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गोवर्धन ‘अधिक मास’ मेले में मुस्लिम दुकानदारों पर प्रतिबंध लगाने की संतों ने की मांग का समर्थन

गोवर्धन ‘अधिक मास’ मेले में मुस्लिम दुकानदारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग का संतों ने किया समर्थन

प्रयागराज। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगर गोवर्धन में आगामी ‘अधिक मास’ मेले को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें सामने आई हैं। श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष पंडित दिनेश फलाहारी जी महाराज ने इस मेले के आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने मेले के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों को दुकानें लगाने और किसी भी व्यावसायिक गतिविधि में भाग लेने से रोक लगाने की मांग की है। यह मांग प्रयागराज और अयोध्या के कई संतों द्वारा भी समर्थन प्राप्त हो रही है।

नारायणाचार्य जगतगुरु शांडिल्य महाराज ने मीडिया से कहा कि ‘‘अधिक मास मेले में मुस्लिम समुदाय का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यह मेले और तीर्थ स्थल शुद्धता का प्रतीक हैं, इसलिए मुस्लिमों को इस आयोजन में भाग लेने से रोका जाना चाहिए।’’ उन्होंने दिनेश फलाहारी की मांग को पूरी तरह सही बताते हुए इस पर पूरी तरह अमल करने की आवश्यकता बताई।

वहीं जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि ‘‘यह दुखद है कि भारत के विभाजन के बाद भी मुस्लिम समाज का व्यवहार अच्छा नहीं रहा। पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमापार हिंदुओं को नागरिकता नहीं देते और अत्याचार करते हैं, जबकि भारत में सभी को समान अधिकार मिले हैं। परंतु मदरसों में भड़काऊ संदेश दिए जा रहे हैं और सरकार के द्वारा भी उन्हें समर्थन प्रदान किया जा रहा है।’’

परमहंस ने आगे कहा कि ‘‘मुस्लिमों पर मेले में प्रतिबंध लगाने के लिए केवल पत्र लिखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए मथुरा निवासियों, साधु-संतों को साथ लेकर धरना-प्रदर्शन और बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरना होगा। तभी सरकार इस मांग को गंभीरता से लेगी। हिंदू समाज के अंदर निरंतर विघटन और बंटवारे के कारण इस तरह के मुद्दे सुचारू रूप से हल नहीं हो पा रहे हैं।’’

साकेत भवन मंदिर, अयोध्या धाम के महंत सीताराम दास ने भी इसे समर्थन देते हुए कहा कि ‘‘श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मथुरा और गोवर्धन के अधिक मास मेले के दौरान गैर-सनातनी लोगों के प्रवेश और दुकानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग उचित है। कट्टरपंथी और जिहादियों की दुकानें सनातन धर्म के लिए खतरा हैं, इसलिए इन्हें प्रतिबंधित करना चाहिए।’’

महाराजों के इस समर्थन के बीच प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन इस विवाद ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर सनसनी पैदा कर दी है। मेले का आयोजन गोवर्धन की धार्मिक महत्ता और सांस्कृतिक विरासत के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अतः सभी पक्षों से शांति और सौहार्द के साथ समाधान की अपील की जा रही है ताकि त्योहार बिना किसी विघ्न के सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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