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निकोबारवासी तीन वन्यजीव अभयारण्यों के प्रस्ताव का विरोध करते हैं

Nicobarese oppose proposal for three wildlife sanctuaries

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024। निकोबार के आदिवासी परिषद ने केंद्र सरकार द्वारा लिटिल निकोबार, मेरी और मेंचल द्वीपों पर तीन वन्यजीव अभयारण्यों के प्रस्तावित निर्माण के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। परिषद का कहना है कि इस महत्वपूर्ण फैसले में स्थानीय निवासियों से कोई चर्चा या सलाह-मशविरा नहीं किया गया, जिससे उनके अधिकारों और जीवनशैली पर गहरा असर पड़ सकता है।

ट्राइबल काउंसिल के प्रमुख सदस्यों ने बताया कि केंद्र सरकार ने बिना किसी पूर्व सूचना या साझेदारी के यह प्रस्ताव रखा है, जिससे द्वीपों के मूल निवासियों की आवाज़ अनसुनी रह गई है। परिषद का कहना है कि इन क्षेत्रीय निवासियों का वन्यजीव संरक्षण में योगदान महत्वपूर्ण है और उन्हें शामिल किए बिना निर्णय लेना गलत कदम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लिटिल निकोबार, मेरी और मेंचल द्वीपों में वन्यजीवों की विविधता अत्यंत समृद्ध है, लेकिन साथ ही वहाँ की पारंपरिक जीविका और सामाजिक परिस्थितियां भी विशिष्ट हैं। आदिवासी समुदाय प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं और अभयारण्यों के निर्माण से उनके संसाधनों की पहुंच सीमित हो सकती है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ सकता है।

निकोबार परिषद का यह भी कहना है कि प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले अधिकारिक बैठकों, स्थानीय संवाद और व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है ताकि सभी हितधारकों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा सके। परिषद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतें और आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।

केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कई पर्यावरण और मानवाधिकार संगठन भी इस मामले को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। वे मानते हैं कि सतत विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, जिसमें स्थानीय निवासियों की भागीदारी अनिवार्य है।

जैसे-जैसे यह मुद्दा चर्चा में आया है, यह स्पष्ट हो गया है कि वन्यजीव संरक्षण के लिए सिर्फ शासन की नीतियां ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। निकोबार के निवासियों की मांग है कि उनके अधिकारों को सम्मानित करते हुए एक समन्वित योजना बनायी जाए, जो पर्यावरण व मानव दोनों का हित साधे।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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