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भारत के परमाणु मंच पर प्रवेश का पुनः अवलोकन

Revisiting India’s entry onto the nuclear stage

18 मई 1974 को भारत ने अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जब उसने भूमिगत परमाणु फिशन डिवाइस का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण का कोडनेम ‘स्माइलिंग बुद्धा’ था, जिसने भारत को विश्व के छठे परमाणु शक्ति सम्पन्न देश के रूप में स्थापित कर दिया।

इस ऐतिहासिक घटना ने भारत की रक्षा तथा तकनीकी क्षमता को एक नई ऊंचाई प्रदान की। ‘स्माइलिंग बुद्धा’ का परीक्षण न केवल देश की सुरक्षा नीति के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि इसने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत के सामरिक महत्व को भी बढ़ाया।

भारत के वैज्ञानिक समुदाय ने इस परीक्षा में गहन मेहनत और विशेषज्ञता का परिचय दिया। परीक्षण के पीछे की रणनीति और तकनीकी जटिलताओं को समझना आज भी शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय है।

जब यह खबर सामने आई, तब दुनिया की प्रमुख शक्तियों ने इस कदम की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया कि यह परीक्षण रक्षा उद्देश्यों के लिए था और इसका उद्देश्य किसी प्रकार की आक्रामक नीति को बढ़ावा देना नहीं था।

स्माइलिंग बुद्धा परीक्षण ने भारत के लिए नई राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियाँ भी प्रस्तुत कीं, वहीं देश की प्रतिष्ठा और आत्म-विश्वास में वृद्धि हुई। यह परीक्षण भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में आज भी याद किया जाता है।

अतः, 18 मई 1974 का दिन भारतीय इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जो हमारी सुरक्षा नीति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर देश की स्थिति को मजबूत करने वाला था। इस ऐतिहासिक कदम को याद करना और समझना भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की गाथा को समृद्ध करता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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