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पाण्डुलिपियां भारत की सांस्कृतिक आत्मा हैं, संरक्षण के लिए आगे आएं: सीएम योगी

पाण्डुलिपियां भारत की आत्मा, संरक्षण के लिए आगे आएं: सीएम योगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों के नाम लिखी गई एक पत्र में पाण्डुलिपियों के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पाण्डुलिपियों को भारत की आत्मा माना जाना उनकी गहरी समझ का परिचायक है।

सीएम योगी ने पत्र में कहा, “भारत की आत्मा क्या है? यह प्रश्न सभी के मन में आता है। हो सकता है कि आपका उत्तर वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, गीता, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, लीलाधर श्रीकृष्ण, महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु नानकदेव या संत कबीर में से कोई एक हो। पर यह आत्मा अक्षुण्ण रूप से श्रवण परंपरा से पाण्डुलिपियों में संरक्षित है और तकनीकी प्रगति के बाद ये ग्रंथ हमारे घर-घर तक पहुंच सके हैं। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी इन्हें भारत की आत्मा का अध्याय मानते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि पाण्डुलिपियों में सदियों से संचित ज्ञान भारत की शक्ति और पहचान है। यह सांस्कृतिक-बौद्धिक धरोहर चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, कला, संगीत और आध्यात्मिकता जैसे विविध क्षेत्रों की विद्या का संग्रह है। उत्तर प्रदेश को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की धरती बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर और अविनाशी काशी इसका साक्षी हैं।

मुख्यमंत्री ने “ज्ञान भारतम् मिशन” का उल्लेख किया, जो भारत सरकार की एक ऐतिहासिक पहल है और प्राचीन पाण्डुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने का कार्य करती है। इस मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय डिजिटल रिपोजिटरी बनाई जाएगी, जिससे छात्र और शोधकर्ता भारत की ज्ञान परंपरा से जुड़े रह सकेंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि यदि उनके पास प्राचीन पाण्डुलिपियां, हस्तलिखित ग्रंथ, ताड़पत्र आदि हैं, तो वे “ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप” या पोर्टल पर जाकर उनकी जानकारी जरूर साझा करें ताकि उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

सीएम योगी ने कहा, “पाण्डुलिपियों का संरक्षण केवल विरासत बचाने का काम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य ज्ञान की कुंजी सुरक्षित रखना है। आप इन्हें उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार को दान भी कर सकते हैं। यह मिशन हमारी सभ्यतागत जड़ों की सुरक्षा के साथ-साथ देश को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर करेगा।”

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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