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“साहब की तेजी”: सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने का अल्टीमेटम झटपट जारी

गोहपारू में “साहब की तेजी”: सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने का अल्टीमेटम झटपट जारी
शहडोल ।

 

 


जिले के गोहपारू तहसील अन्तर्गत एक ऐसा मामला आया है जहाँ नायब तहसीलदार के फैसले और उनकी कार्यवाई ने पूरे राजस्व महकमे को मेडल देने पर विवश कर दिया आपको बता दें ये साहब कोई और नही बल्कि कोयलांचल नगरी में जमीनों का खुर्दबुर्द करने में इन्हें महारथ हासिल था।शिकवे शिकायत तो साहब के यहाँ भी थे पर एक लंबे समय की नौकरी के बाद साहब को प्रमोशन मिल गया और साहब आरआई से नायब हो गए नायब होते ही इनके कारनामे और भी नायाब हो गए
यूं तो गोहपारू से लेकर खन्नौधी क्षेत्र में दर्जनों ऐसी शासकीय भूमि और उन पर कब्जा है पर साहब ने जल्दबाजी सिर्फ सुभाग के मामले में ही दिखाई जबकि उसी भूमि पर अन्य काबिज व्यक्ति पर साहब ने एक जरीब तक नही चलवाई और एक तरफा कार्यवाही कर खुद का ला एन्ड आर्डर चला दिए।

एक कहावत है, “जल्दी का काम शैतान का”—लेकिन गोहपारू में नायब तहसीलदार ने इसे बिल्कुल उल्टा साबित कर दिया। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले सुभाग जयसवाल को इतनी फुर्ती से बेदखली का आदेश और जुर्माना थमा दिया कि ऐसा लग रहा है जैसे प्रशासन ने टाइमर सेट कर रखा हो।
ग्राम बेला की शासकीय आ.ख. नं. 131 (रकवा 0.053 हेक्टेयर) पर बाउंड्री बनाते समय शायद सुभाग साहब सोच रहे थे, “थोड़ा और टिकाऊ कर लें”—लेकिन नायब तहसीलदार की चपलता ने उनकी योजना आधे रास्ते में ही रोक दी।आपको बता दें इसी बेला भदवाही में स्कूल और उससे लगे शासकीय भूमि पर लोगो द्वारा अतिक्रमण किया गया है पर मजाल है कि साहब वहां नजर डाल दें एक जानकारी और जी वहां के समाजसेवियों ने हमसे साझा किया है कि साहब को इस बेदखली के एवज में एक मोटा लिफाफा मिला है।

दो दिन का अल्टीमेटम और तोड़ दिया बाउंड्री..

इस बेदखली के लिए साहब इतने उतावले थे कि दो दिन में जुर्माना और जेल की कानूनी नसीहत भी दे डाली जबकि यह सर्वविदित है कि सिविल का मामला पीढियों खत्म नही होती और अपील और दलीलों के बीच मामला दशको उलझा रहता है यहाँ साहब ने दो दिनों में 10,000 रुपये जुर्माना जमा करो और एक सप्ताह के अंदर कब्जा हटाओ, नहीं तो सिविल जेल की हवा खाओ। जाहिर है, “जल्दी करो, वरना जेल में जाओ” – प्रशासन ने यह संदेश बहुत ही सरल और प्रभावशाली तरीके से दिया।
आवेदनकर्ता रामदेव जायसवाल के लिए यह आदेश किसी जीत से कम नहीं है। हल्का पटवारी और आवेदक को भी प्रतिलिपि भेजी गई, ताकि कोई बहाना न बने।
आखिरकार गोहपारू प्रशासन ने दिखा दिया कि अगर साहब की जमीन पर नजर लगी है, तो आदेश भी फटाफट आ सकता है व्यवस्था और फुर्ती, दोनों ही कमाल की!

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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