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झरिया कोयला आगें हो सकती हैं अधिक गर्म, उत्सर्जित कर सकती हैं अधिक ग्रीनहाउस गैसेस, जैसा सोचा गया था

Jharia coal fires may burn hotter, emit more greenhouse gases than thought

झरिया, झारखंड में कोयला खदानों में लगी आगें, पर्यावरणीय विशेषज्ञों के लिए चिंता का बड़ा विषय बनी हुई हैं। जहां औद्योगिक उत्सर्जनों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है, वहीं झरिया जैसे क्षेत्रों में बिना नियंत्रण वाली कोयले की आगों से निकलने वाले उत्सर्जन अक्सर वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों के आंकलन में शामिल नहीं होते। यह तथ्य पर्यावरण विश्लेषकों को चौंकाने वाला साबित हो रहा है।

कोयले की आगें जमीन के अंदर से लंबी अवधि तक जलती रहती हैं और यह प्रक्रिया बड़ी मात्रा में हानिकारक गैसें वातावरण में छोड़ती है। खासकर झरिया क्षेत्र में ये आगें कई दशकों से निर्बाध रूप से चल रही हैं, जिससे वहाँ की हवा और पर्यावरण की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आगों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों का स्तर अब पहले की तुलना में कहीं अधिक है।

औद्योगिक उत्सर्जन पर वैश्विक समुदाय ने गंभीर कदम उठाए हैं और उन्हें नियमित रूप से निरीक्षण व नियंत्रण में रखा जाता है। लेकिन फ्यूगिटिव उत्सर्जन, जो कि बिना किसी नियंत्रण के वातावरण में उत्सर्जित होते हैं, उनका आकलन उतना सटीक रूप से नहीं हो पाता। झरिया जैसी आगों से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसों का कुल योगदान अभी तक सही से समझा नहीं जा पाया है।

वायु और पर्यावरण वैज्ञानिक इन आगों के प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं और उनका कहना है कि यदि इन्हें नजरअंदाज किया गया तो जलवायु परिवर्तन की लड़ाई में बड़ी चुनौती बन सकती हैं। कोयला आगों से निकली गैसें न केवल कार्बन डाइऑक्साइड बल्कि मीथेन और अन्य परिष्कृत ग्रीनहाउस गैसों को भी शामिल करती हैं, जो पारंपरिक औद्योगिक प्रदूषण से कहीं अधिक गर्मी फंसाने वाली होती हैं।

झारखंड सरकार तथा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को इस विषय पर तत्परता दिखाते हुए इन आगों को नियंत्रित करने के लिए व्यापक योजनाएं बनानी होंगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसियों को भी फ्यूगिटिव उत्सर्जनों के आंकलन में इनको शामिल करने पर विचार करना चाहिए ताकि वैश्विक स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास सटीक और प्रभावी हो सकें।

कुल मिलाकर झरिया कोयला आग पर व्यापक शोध और सक्रिय नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक हैं ताकि हम न केवल स्थानीय पर्यावरण बल्कि वैश्विक जलवायु संरक्षण के प्रयासों को भी सफल बना सकें।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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