दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

पंचायत निकायों के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, पांच सदस्यीय टीम नियुक्त

पंचायत निकायों के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, पांच सदस्यीय टीम नियुक्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण से संबंधित मुद्दों के अध्ययन और सुझाव प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। इस आयोग के गठन को लेकर पंचायतीराज अनुभाग-3 द्वारा बुधवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।

अधिसूचना में बताया गया है कि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद आयोग के अध्यक्ष और पांच सदस्यों की नियुक्ति की गई है। आयोग के अध्यक्ष के तौर पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह को नामित किया गया है। अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी एसपी सिंह शामिल हैं।

प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी आदेश में यह उल्लेख किया गया है कि आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी होगी। साथ ही, आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को प्रदान किए जाने वाले मानदेय, भत्ते एवं अन्य सुविधाओं के लिए अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।

यह अधिसूचना पंचायतीराज अनुभाग-3 की पूर्व अधिसूचना संख्या 1274/33-3-2026 दिनांक 18 मई 2026 के तहत जारी की गई है। प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर सरकार ने इसकी तैयारियां तीव्र कर दी हैं। विशेष रूप से पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए यह आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सरकार का उद्देश्य है कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायत चुनावों के आरक्षण का अंतिम नक्शा तैयार किया जाए। इस संदर्भ में सरकारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि आयोग निश्चित समयावधि के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, तथा आवश्यक होने पर सरकार आयोग के कार्यकाल या रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ा भी सकती है।

आयोग का मुख्य कार्य पंचायतों में पिछड़ा वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करना और संवैधानिक प्रावधानों की जांच करना होगा, ताकि ओबीसी आरक्षण का न्यायसंगत निर्धारण हो सके। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग की प्रतिनिधित्व और सामाजिक अधिकारों को सशक्त करने में मदद मिलेगी।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!