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नौतपा की तेज़ी से झुलसता यूपी: बांदा पहुंचा 46.2 डिग्री सेल्सियस पर

नौतपा में झुलसता यूपी: बांदा 46.2 डिग्री पर

लू का रेड अलर्ट: घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं

  • सीएम योगी का आदेश: लाउडस्पीकर से अलर्ट जारी करें
  • जलवायु परिवर्तन का असर: फसलें, नदियाँ और जीवन संकट में
  • विशेषज्ञों की चेतावनी: हरियाली और जल संरक्षण ही बचाएगा

मेरठ। पूरे प्रदेश में ही नहीं, देश भर में इस बार गर्मी ने एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तापमान ने 46.2 डिग्री सेल्सियस को पार कर लिया है, जो राज्य के लिए अत्यधिक चिंता का विषय है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है, पशु-पक्षी भी अत्यधिक तपिश से परेशान हैं। लोक जनमानस घरों में रहने को मजबूर है क्योंकि सूर्य की आंच असहनीय हो चुकी है।

नौतपा के दौर में यह उष्णता और भी बढ़ती जा रही है। मौसम विभाग ने 31 मई तक राहत के संकेत नहीं दिए हैं, जिसके कारण प्रदेश में लू का प्रकोप जारी रहेगा। कई जिलों में लू के रेड अलर्ट घोषित किए गए हैं और दिन के वक्त बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रदेश के प्रत्येक कोने में लाउडस्पीकर के माध्यम से अलर्ट जारी किया जाए ताकि लोगों को समय पर सतर्क किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि मौसम पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित एवं जनकेंद्रित बनाया जाए जिससे जनता को बेहतर सुरक्षा मिल सके। बदलते मौसम ने जनजीवन को अस्थिर कर दिया है। जलवायु परिवर्तन के कारण ही हम भीषण गर्मी और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं।

सोसाइटी ऑफ ग्रीन वर्ड फॉर सस्टेनेबल एनवायरनमेंट के सेक्रेटरी डॉ. आर.एस. सेंगर ने कहा कि इस गर्मी से निपटने के लिए पौधारोपण और जल संरक्षण जैसी पहलों को तेज़ी से अपनाना होगा। जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है ताकि लोग इस संकट को समझें और कदम उठा सकें। डॉ. सेंगर ने भविष्य की चिंताएं जताईं कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो फसलों की पैदावार, खासकर धान, गेहूं, मक्का और गन्ने की कटाई प्रभावित होगी। साथ ही, नदियों का सूखना और बाढ़ जैसी घटनाएं भी बढ़ेंगी, जो जल संकट को और गहरा बना सकता है।

डॉ. सेंगर ने कहा कि अभी समय है रोकथाम करने का। हरियाली बढ़ाना, जल निकायों को पुनर्जीवित करना और कंक्रीटीकरण कम करना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि बहुमंजिला इमारतों में वर्टिकल गार्डनिंग जैसे उपायों से शहरों में तापमान नियंत्रित किया जा सकता है। हर शहर को हीट एक्शन प्लान बनाना चाहिए और उसे व्यवहार में लाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में गर्मी से निपटने के लिए जो योजनाएं बनती हैं वे प्रतिक्रिया स्वरूप होती हैं, जबकि हमें ऐसी रणनीतियां बनानी होंगी जो पहले से ही सिस्टम में शामिल हों, ताकि गर्मी की तीव्रता को कम किया जा सके। निर्माण सामग्री ऐसी हो जो गर्मी को कम अवशोषित करे, और पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाकर छाया का विस्तार किया जाए।

गरीब और कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, इसलिए उनके लिए कम्युनिटी स्तर पर कार्यक्रम बनाना और लागू करना जरूरी है। मजदूरों के काम करने के स्थानों पर छाया की व्यवस्था हो ताकि उनकी गर्मी से सुरक्षा हो सके। स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच भी बढ़ानी होगी क्योंकि अत्यधिक गर्मी के कारण कई बीमारियां फैलती हैं।

डॉ. सेंगर ने अंतिम रूप में कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस बढ़ते खतरे को समझते हुए क्लाइमेट रिजीलियंस को अपनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। समय रहते प्रभावी योजनाएं लागू न की गईं तो भविष्य में स्थिति और भयावह हो सकती है। हमें हर स्तर पर संयुक्त प्रयास करने होंगे ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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