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कैसे कान्स ने असहमति को प्रबंधित करना सीखा

How Cannes learnt to manage dissent

कान्स फिल्म फेस्टिवल, जो विश्व के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सवों में से एक है, ने राजनीति को अपनाने की कला में महारत हासिल कर ली है, जबकि इसे एजेंट प्रोवोकेटर्स द्वारा बाधित होने से बचाया जाता है। हर वर्ष विश्वभर से फिल्मकार, कलाकार और दर्शक इस महोत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिससे यह आयोजन सांस्कृतिक एवं राजनीतिक सम्मेलनों का भी उपजाता स्थल बन गया है।

हालांकि कला और राजनीति का मेल अक्सर विवादों को जन्म देता है, लेकिन कान्स का प्रबंधन टीम इसकी सीमाओं को बखूबी समझती है। महोत्सव में सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों को उठाये जाने की अनुमति दी जाती है, किन्तु हिंसा या विक्षिप्तता की किसी भी प्रकार की क्रिया को सख्ती से रोका जाता है। यह संतुलन बनाए रखना कान्स की सफलता की कुंजी माना जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में, कान्स ने प्रदर्शनों और असहमति को स्वीकार करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं, जिनमें प्रतिभागियों को शांति पूर्वक अपनी आवाज उठाने की आज़ादी दी जाती है। इसके लिए आयोजक विशेष सुरक्षा व्यवस्था और मॉनिटरिंग तंत्र लागू करते हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न घटे।

कान्स की इस समझदारी ने न केवल इसकी विश्वसनीयता बढ़ाई है बल्कि यह संदेश भी दिया है कि कला के माध्यम से संवाद स्थापित किया जा सकता है बिना किसी अराजकता के। विभिन्न देशों के राजनीतिक हलचलों के बीच भी कान्स ने अपनी भूमिका को सुरक्षित रखते हुए सभी के लिए एक समावेशी मंच तैयार किया है।

नतीजतन, कान्स फिल्म फेस्टिवल आज केवल एक फिल्म महोत्सव नहीं बल्कि एक जागरूक सामाजिक और राजनीतिक संवाद का केंद्र बन चुका है, जहां असहमति को सम्मानपूर्वक प्रबंधित किया जाता है और शांति एवं रचनात्मकता का माहौल बना रहता है। यह अनुभव अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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