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मुस्लिम नेताओं ने एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

मुस्लिम नेताओं ने एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) पर फैसले का इस्लामिक धर्मगुरुओं ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि अब चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए और न्यायपालिका के फैसले का सभी को सम्मान करना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग के एसआईआर के अधिकार को वैध ठहराया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में सुधार चुनाव आयोग के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के अंतर्गत आता है और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना है।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा, “एसआईआर का निर्णय स्वागत योग्य है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि चुनावो में निष्पक्षता बनी रहे। चुनाव आयोग द्वारा असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, केरल और तमिलनाडु में कराए गए विधानसभा चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष थे।”

मौलाना बरेलवी ने आगे कहा कि कई वोटर या तो मृत हो चुके हैं या अन्य जगहों पर स्थानांतरित हो गए हैं, इसलिए एक साफ-सुथरी और सही वोटर सूची बनाना आवश्यक है। उन्होंने इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के आरोपों से स्पष्ट रूप से इनकार किया।

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मिर्जा मोहम्मद यासूब अब्बास ने न्यायिक फैसले का समर्थन किया और कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत का निर्णय अंतिम है, जिस पर किसी को सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि मामला विवादित होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और वहां इसकी वैधता को सत्यापित किया गया।

उन्होंने कहा, “अगर हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सवाल उठाएंगे तो हम सीधे देश की न्यायिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। इसलिए सभी को इसका सम्मान करना चाहिए।”

भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ 1950 के नियमों का उल्लंघन नहीं करती और इसे संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अनुमति प्राप्त है।

इस फैसले के बाद विभिन्न समुदायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास बढ़ा है और यह सुनिश्चित किया गया है कि आने वाले चुनावों में इस मतदाता सूची का उपयोग निष्पक्ष तरीके से किया जाएगा।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को कानूनी मान्यता दी है और लोकतंत्र की मूल भावना को मजबूत किया है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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