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एम.धनपाल ने कहा: AIADMK का पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों पर प्रतिबंध केवल भ्रम की संभावना खत्म करने के लिए है

AIADMK’s embargo on former functionaries is only to eliminate any scope for confusion, says MP

चेन्नई। AIADMK के पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह कदम पूर्व सदस्यों को उनकी पुरानी पदों पर पुनः स्थापित न करने के लिए लिया गया है। हालांकि, राज्यसभा सांसद एम. धनपाल ने इस सुझाव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि यह प्रतिबंध केवल भ्रम की स्थिति को खत्म करने के लिए लगाया गया है, न कि पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों को उनकी पदवी से वंचित करने के लिए।

धनपाल ने कहा, “यह निर्णय पार्टी के महासचिव के अधिकार क्षेत्र में आता है कि कब और किसे किस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों को पुनर्स्थापित करने या न करने का फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा, और इस प्रतिबंध का मकसद किसी पर कोई रोक लगाना नहीं है।”

AIADMK में यह विवाद तब उभरा जब कुछ पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों को पार्टी के विभिन्न पदों से हटाने के बाद इस कदम को उनकी भूमिका पर प्रभाव डालने के तौर पर देखा गया। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह प्रतिबंध पार्टी संगठन में स्पष्टता और अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी था, ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक असमंजस की स्थिति उत्पन्न न हो।

पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि “पार्टी संगठन में प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल और भूमिका स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए। पुराने कार्यकारिणी सदस्यों पर यह प्रतिबंध ऐसा कोई संकेत नहीं है कि उन्हें फिर से शामिल नहीं किया जाएगा। यह केवल एक व्यवस्थात्मक कदम है।”

राज्यसभा सांसद के इस बयान के बाद पार्टी के समर्थकों और विपक्षी दलों के बीच भी विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ का कहना है कि यह प्रतिबंध पार्टी की आंतरिक राजनैतिक स्थिरता को बढ़ावा देगा, जबकि अन्य इसे सफेदपोश राजनीति के रूप में देख रहे हैं।

राज्यसभा सांसद धनपाल ने यह भी जोड़ा, “पार्टी के महासचिव के पास पूरी स्वतंत्रता है यह तय करने के लिए कि किन सदस्यों को किस पद पर नियुक्त करना है। हम सबका लक्ष्य पार्टी की मजबूती और जनता की सेवा है।”

इस संबंध में राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि AIADMK जैसी बड़ी पार्टी में संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखना आवश्यक होता है, और इस तरह के प्रतिबंध कई बार ऐसा संकेत देने के लिए होते हैं कि कोई भ्रम या गलतफहमी न फैले।

इस मामले की प्रगति पर नजदीकी नजर रखे जाने की संभावना है, क्योंकि आगामी चुनावों के मद्देनजर पार्टी के आंतरिक संगठन परिवर्तन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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