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हिन्द राजब की फिल्म ‘द वॉइस ऑफ हिन्द राजब’ को ‘ए’ प्रमाण पत्र मिलेगा, मौखिक प्रतिबंध के हफ्तों बाद

The Voice of Hind Rajab to receive ‘A’ certificate, weeks after oral ban

नई दिल्ली। एक ओस्कार-नामांकित फिल्म, जो गाजा में इजरायली बलों द्वारा पांच वर्षीय एक फलस्तीनी लड़की की हत्या की घटनाक्रम पर आधारित है, भारतीय सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा शुरू में अस्वीकार कर दी गई थी। बोर्ड ने इस फिल्म को लेकर चिंताएँ जताई थीं कि यह भारत-इजरायल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

फिल्म निर्माता और आलोचक लंबे समय से CBFC के इस निर्णय की आलोचना कर रहे थे, क्योंकि यह फिल्म एक संवेदनशील लेकिन जरूरी विषय को उजागर करती है। भारत सरकार और CBFC ने इस फिल्म के उच्च स्तर की जांच और विचार-विमर्श के बाद अंततः इसे प्रमाणित करने का फैसला किया है।

सूत्रों के अनुसार, फिल्म को ‘ए’ (वयस्कों के लिए) प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके पीछे मुख्य तर्क यह है कि फिल्म में कुछ सशक्त और भावुक दृश्य हैं, जिन्हें समालोचनात्मक रूप से पेश किया गया है। फिल्म के निर्माता ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है और बताया कि वे चाहते हैं कि इस तरह की महत्वपूर्ण कहानियां जनता तक सही रूप में पहुँचें।

इस घटना से यह साफ होता है कि सेंसर बोर्ड और सरकार मानते हैं कि कला और फिल्म माध्यम के जरिये राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर संवाद कायम किया जाना चाहिए, भले ही वह कुछ देशों के बीच चल रहे नाजुक संबंधों को चुनौती दे।

इजरायल और भारत के बीच मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, जिससे भारत इस मुद्दे पर काफी सतर्क रहता है। भारत सरकार की यह कोशिश रहती है कि दोनों देशों के बीच मित्रता कायम रहे, लेकिन साथ ही वह स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार को भी महत्व देती है।

फिल्म के विषय वस्तु को देखते हुए, यह निर्णय सामाजिक न्याय और मानवाधिकार के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आलोचकों की राय है कि इस तरह की फिल्में दर्शकों को सच्चाई के करीब लाती हैं और उन्हें संवेदनशील मुद्दों को समझने का मौका देती हैं।

बहरहाल, फिल्म को व्यक्तियों और फिल्म समीक्षकों से भी व्यापक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता और आलोचक इस फिल्म को किस तरह स्वीकारते हैं।

CBFC के अधिकारियों ने यह भी बताया है कि वे भविष्य में इस प्रकार की सशक्त और विचारोत्तेजक फिल्मों को अधिक स्वतंत्रता देने के लिए नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। यह कदम भारतीय फिल्म उद्योग में विविधता और स्वतंत्र अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने वाला होगा।

इस फिल्म की रिलीज के बाद, उम्मीद है कि भारत में राजनीतिक संवेदनशील विषयों पर फिल्मों का सुनियोजित और संरक्षित मंच मिलेगा, जो भारतीय सिनेमा की गुणवत्ता और सामाजिक प्रभाव को और बेहतर बनाएगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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