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देखें: 2026 में 11 सालों में सबसे सूखा मानसून, फसल उत्पादन पर पड़ेगा कितना प्रभाव

Watch: 2026 to be driest in 11 years. How badly can a deficient monsoon hit crop output?

नई दिल्ली। भारत में 2026 के मानसून को लेकर कृषि जगत में एक बड़ी चुनौती सामने आ सकती है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार इस वर्ष ‘मानसून की कमी’ (Deficient Monsoon) होने की संभावना है, जो पिछले 11 वर्षों में सबसे सूखा मानसून हो सकता है। कृषि क्षेत्र के लिए यह खबर चिंता का विषय है क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर करता है।

देश के कई हिस्सों में मानसून की कमी का मतलब सीधे तौर पर कम वर्षा और जल संकट से होता है। जब बारिश कम होती है, तो न सिर्फ फसल उत्पादन प्रभावित होता है बल्कि जलाशयों की स्थिति भी खराब हो जाती है। पानी के संकट के चलते सिंचाई पर निर्भरता बढ़ जाती है और किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं।

फसल उत्पादन पर प्रभाव

इतिहास गवाह है कि कमजोर मानसून वर्ष में खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट आई है। साल 2015 और 2019 के मानसून की कमी के दौरान भारत की प्रमुख फसलों जैसे धान, गेहूँ, और मक्का की पैदावार में कमी दर्ज की गई थी। कम पानी की उपलब्धता के कारण यह फसलें समय पर और अच्छी गुणवत्ता की नहीं बन पाती हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

जलाशयों और सिंचाई पर असर

मानसून की कमी सीधे तौर पर जलाशयों की भरपाई क्षमता को प्रभावित करती है। भारत के कई राज्यों में जलाशयों का जलस्तर घट जाता है, जिससे सिंचाई के स्रोत सीमित हो जाते हैं। जो किसान रसीद आधारित सिंचाई प्रथाओं पर निर्भर होते हैं, उन्हें मजबूरन कम सिंचाई करनी पड़ती है या पेयजल और कृषि दोनों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

कृषि अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव

मानसून पर निर्भर कृषि क्षेत्र कमजोर होने से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे न केवल किसानों की आय कम होती है, बल्कि उनकी लागत बढ़ जाती है। बीज, खाद, और मजदूरी के खर्च बढ़ जाते हैं, वहीं ऋण लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए स्थिति और गंभीर हो जाती है। फलस्वरूप, बढ़ती खेती लागत और कम उत्पादन का असर खाद्य कीमतों पर भी पड़ता है, जो पूरे देश में महंगाई को बढ़ावा देता है।

सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए समय-समय पर राहत उपाय और कृषि बीमा योजनाएं लागू करती है, लेकिन मानसून की अनिश्चितता से पूरी तरह बचना आसान नहीं होता। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसानों को जल संरक्षण, जल संचयन तकनीकों और प्रभावी सिंचाई प्रबंधन की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में सूखे के प्रभाव को कम किया जा सके।

अंततः, 2026 के सूखे मानसून को लेकर सभी हितधारकों को मिलकर प्रयास करना होगा ताकि देश की कृषि और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखा जा सके और किसान आत्मनिर्भर बने।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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