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बारिश की तेज झड़ी से मिट्टी में नमी और नाइट्रोजन को हो सकता है दोहरा नुकसान

Bursts of rain may deal a double whammy to soil moisture, nitrogen

हाल ही में हुई तेज बारिश और उसके बाद के सूखे मौसम ने किसानों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना दिया है। विभिन्न शोधों से पता चला है कि तीव्र वर्षा की घटनाएँ मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन को बहा सकती हैं, जो पौधों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। वहीं, बारिश के बाद अचानक सूखे का आना मिट्टी की नमी को तेजी से भाप बनाकर खत्म कर देता है, जिससे कृषि भूमि की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती है।

नाइट्रोजन पौधों के विकास के लिए आवश्यक कंपोनेंट है और यह मिट्टी में अन्य पोषक तत्वों के साथ मिलकर फसलों की वृद्धि में मदद करता है। लेकिन जब भारी बारिश होती है तो यह नाइट्रोजन मिट्टी से बहकर नदियों या जल स्रोतों में चला जाता है, जिससे खेतों की उर्वरता कम हो जाती है। इसके अलावा, नमी की कमी के कारण मिट्टी की जल धारण क्षमता भी घट जाती है, जो किसान और पर्यावरण दोनों के लिए बुरी खबर है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश के बाद यदि लंबे समय तक सूखा बना रहता है तो मिट्टी में नमी तेजी से वाष्पित हो जाती है। इस कारण न केवल मिट्टी सूख जाती है, बल्कि पौधों की जड़ों तक जल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसानों को समय-समय पर नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए और मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए उचित सिंचाई एवं संरक्षण उपाय अपनाने चाहिए। ऐसे उपाय फसलों की वृद्धि को बढ़ावा देंगे और पर्यावरणीय प्रभावों को भी कम करेंगे।

संक्षेप में, बारिश की तेज झड़ियाँ और उसके बाद का सूखा दोनों ही मिट्टी की नमी और नाइट्रोजन मात्रा पर विपरीत प्रभाव डालते हैं, जो कृषि उत्पादकता के लिए चुनौती बन रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक और किसानों को मिलकर बेहतर रणनीतियाँ बनानी होंगी ताकि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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