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पटना कलम पुनरुद्धार: कैसे बिहार वापस ला रहा है खोई हुई कला जिसने रोजमर्रा की भारत की झलक पेश की

Patna Kalam revival: How Bihar is bringing back the lost art that captured everyday India

पटना। बिहार में एक बार फिर से 18वीं सदी की लगभग भुला दी गई कला ‘पटना कलम’ को पुनर्जीवित करने की कोशिशें जोर पकड़ रही हैं। इस कला में मुगल मिनिएचर और यूरोपीय प्राकृतिकता का अनोखा मेल देखने को मिलता था, जिसने अपने समय में भारतीय रोजमर्रा की जिंदगी की सजीव झलक प्रस्तुत की।

पटना कलम अपनी विशेष तकनीक और विस्तृत विवरण के कारण कला प्रेमियों के बीच खासा प्रसिद्ध था, लेकिन समय के साथ यह कला धीरे-धीरे विलुप्त होती चली गई। अब आधुनिक कलाकार और सांस्कृतिक संस्थान मिलकर इस बहुमूल्य विरासत को पुनः जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं।

पटना की पांडेय कला के जानकार इतिहासकार डॉ. रेबeka मिश्रा ने बताया, “पटना कलम का इतिहास करीब 18वीं सदी का है, जब मुगल शैली की मिनिएचर पेंटिंग में यूरोपियन नेचुरलिज्म का समावेश हुआ। इस संयोजन से इस कला का एक अनूठा रूप विकसित हुआ जिसने भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की बारीकियों को अभिव्यक्त किया।”

राज्य सरकार भी इस विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रही है। विभिन्न कार्यशालाओं, प्रदर्शनी और कला मेलों का आयोजन किया जा रहा है जहाँ युवा कलाकारों को इस तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे न केवल कला की लोकप्रियता बढ़ रही है बल्कि बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बन रहे हैं।

कलाकार अर्चना सिंह ने कहा, “पटना कलम की विशेषता इसकी सूक्ष्मता और जीवंतता है। इसे सीखकर मैं अपनी संस्कृति से जुड़ी हुई महसूस करती हूँ और इसे आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना महत्वपूर्ण कार्य है।”

इस renaissance के चलते अब पटना कलम से जुड़े संग्रहालय, रचनात्मक केंद्र और शोध संस्थान भी अपनी स्थापना कर रहे हैं। इसके माध्यम से शोधकर्ताओं को इस कला के गहन अध्ययनों और संरक्षण की सुविधा प्राप्त होगी।

पटना कलम का पुनरुद्धार न सिर्फ बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का माध्यम है, बल्कि यह पूरे भारत के पारंपरिक कला स्वरूपों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक मिसाल बन सकता है।

इसके साथ ही यह कला स्थानीय पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर रही है, जिससे आर्थिक विकास के नए स्रोत भी विकसित हो रहे हैं। राज्य के पर्यटन विभाग ने कई आयोजन इस दिशा में किये हैं जहाँ विदेशी पर्यटक भी इस कला को करीब से देखने और समझने का मौका पा रहे हैं।

अतः कहा जा सकता है कि बिहार में पटना कलम पुनरुद्धार एक सकारात्मक पहल है, जो न केवल कला की विरासत को संरक्षित कर रही है, बल्कि इससे जुड़े लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी सुधार ला रही है। इसका विस्तार और संवर्धन निरंतर जारी रहेगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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