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कानपुर : आस्था सिंह का बयान, ‘आरोपी सामने आएं और सच खुलेआम रखा जाए’

कानपुर : आस्था सिंह का बयान, 'आरोपी सामने आए और सच सबके सामने रखा जाए'

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से आस्था सिंह ने हाल ही में अपने और अन्य महिलाओं की सुरक्षा के विषय में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने सोशल मीडिया पर मिलने वाली धमकियों और उन पर लगे आरोपों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। आस्था सिंह ने विशेष रूप से यह मांग की कि जिन लोगों के खिलाफ वह आरोप लगा रही हैं, वे सामने आएं और सीधा सामना करें ताकि हर तथ्य सार्वजनिक और स्पष्ट हो सके।

उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में पहले भी बड़े-बड़े दावे किए गए थे। स्थानीय प्रशासन ने ये दावा किया था कि चौराहों, बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर हेल्पलाइन नंबर और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सही ढंग से की जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। महिला सुरक्षा की दृष्टि से लगाये गए उपाय प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं और इसी वजह से महिलाएं असहज महसूस कर रही हैं।

आस्था सिंह ने बताया कि उनके द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करने के बाद पुलिस ने मामले में तेजी से कदम उठाए और एफआईआर दर्ज की गई। इस पहल से प्रशासन की सक्रियता का पता चलता है। हालांकि, उनकी चिंताएं केवल अपने लिए नहीं हैं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए हैं जो सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं और सार्वजनिक परिवहन जैसे स्थानों पर सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती हैं।

उन्होंने दिल्ली में हालिया एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर तुरंत और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। आस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक एजेंडे को समर्थन देना नहीं है, बल्कि यह एक वास्तविक सामाजिक समस्या है जिसे भलीभांति समझकर ठीक किया जाना चाहिए।

आस्था सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्हें तरह-तरह के अपशब्द वाले संदेश भी प्राप्त हो रहे हैं लेकिन वह इससे घबराने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वो जो सही समझती हैं, उसको खुले तौर पर लेकर आगे बढ़ती रहेंगी। धमकी देने वालों को उन्होंने चुनौती दी कि उनके प्रयास उन्हें रोक नहीं पाएंगे।

आस्था ने पड़ोसी और सामाजिक वातावरण में व्याप्त मानसिकता पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति की सोच केवल उसकी शिक्षा पर निर्भर नहीं करती। कई पढ़े-लिखे लोग भी गलत मानसिकता के शिकार होते हैं, जो सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों के रूप में दिखाई देती है। यह समस्या केवल शिक्षा से नहीं बल्कि सोच और व्यवहार से जुड़ी है।

उन्होंने स्वयं एक अकेले की स्थिति का जिक्र किया जब उन्हें एक मुश्किल परिस्थिति का सामना करना पड़ा और किसी ने मदद नहीं की। उन्होंने अपने आप स्थिति संभाली और वहां से वापस लौट गईं। अब वह चाहती हैं कि संबंधित व्यक्ति सामने आएं और पूरी सच्चाई सार्वजनिक हो, ताकि मामला पूरी तरह स्पष्ट हो सके और आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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