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पुलिस अधिकारियों की वफादारी संविधान नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के प्रति: इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पुलिस अफसरों की वफादारी संविधान से नहीं, सत्ताधारी दल के प्रति, इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर कड़ी टिपण्णी करते हुए कहा है कि कई मामलों में पुलिस अधिकारियों की वफादारी संविधान के बजाय सत्ताधारी राजनीतिक दल के प्रति ज्यादा दिखाई देती है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने यह टिप्पणी गाजियाबाद निवासी राजेंद्र त्यागी और दो अन्य के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को निरस्त करते हुए की। कोर्ट ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और प्रक्रिया संबंधी खामियों पर भी गंभीर सवाल उठाए।

अदालत ने जताई चिंता

अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्रभावित होती रही है। ट्रांसफर, पोस्टिंग और पदोन्नति में राजनीतिक संरक्षण की भूमिका अधिक हो गई है। ऐसे में वे अधिकारी जो सत्ताधारी दल के प्रति वफादारी दिखाते हैं, उन्हें बड़े पद मिल जाते हैं जबकि निष्पक्षता से काम करने वाले अधिकारियों को कम महत्वपूर्ण पदों पर भेजा जाता है।

कोर्ट ने यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए खतरनाक बताया क्योंकि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता कमजोर होती है। न्यायालय ने कहा कि संवैधानिक मूल्यों की जगह राजनीतिक दबाव को प्राथमिकता देना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।

गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग पर भी सवाल

हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग की आशंकाएं जताईं। अदालत ने कहा कि कुछ मामलों में यह कानून गलत तरीके से प्रयोग में लाया जा रहा है जिससे अराजकता और पक्षपात की संभावना बढ़ जाती है। कोर्ट ने अधिकारियों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें सरकार की नीतियों को निष्पक्षता से लागू करना चाहिए, न कि राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

गैंग चार्ट मंजूरी प्रक्रिया में चूक

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क दिया कि गाजियाबाद कमिश्नरेट में गैंग चार्ट को मंजूरी देते समय आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार, पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी की संयुक्त बैठक में इस पर निर्णय होना चाहिए था, परन्तु तब जिलाधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं थे और पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने अकेले इसकी स्वीकृति दे दी। अदालत ने इसे गंभीर त्रुटि माना और पुलिस आयुक्त को चेतावनी दी।

राजेंद्र त्यागी और अन्य पर आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजेंद्र त्यागी को गैंग का सरगना और उनके पुत्र दीपक त्यागी को सदस्य माना गया था। उनके खिलाफ गाजियाबाद और जालौन में जमीन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकी जैसे आपराधिक आरोप हैं। अदालत ने हालांकि पाया कि गैंगस्टर एक्ट लगाने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है, इसीलिए कार्रवाई निरस्त कर दी गई।

बिकरू कांड पर अदालत का जिक्र

हाई कोर्ट ने कारोबारी बिकरू कांड का भी उल्लेख किया जहां विकास दुबे के खिलाफ पुलिस टीम के आठ जवान मारे गए। अदालत ने संचालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी को केवल चेतावनी देना अपर्याप्त बताया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी “संस्थागत जवाबदेही से मुक्ति” की संस्कृति प्रशासनिक प्रणाली को कमजोर करती है और लोकतंत्र के लिए खतरा है।

अदालत ने निष्पक्ष प्रशासन और जवाबदेही को लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में सुधार जरूरी है ताकि पुलिस और प्रशासन राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कानून के अनुरूप कार्य करें।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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