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बिहार एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

Supreme Court to pronounce verdict on Bihar SIR tomorrow

नई दिल्ली। चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने संसद द्वारा निर्धारित कानूनों, नियमों और अपने मैनुअल में स्पष्ट रूप से सीमित शक्तियों को नजरअंदाज करते हुए ‘नागरिकता निर्धारित करने’ का अधिकार अपने आप ले लिया है। यह कार्रवाई बिना किसी उचित कारण के की गई है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव आयोग ने न केवल अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है, बल्कि इसकी कार्रवाई राजनीतिक पक्षपातपूर्ण और अनुचित मानी जा रही है। इन याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्पष्टता प्रदान करे और चुनाव आयोग की शक्तियों को सीमित करे ताकि वह अपने दायरे से बाहर जाकर नागरिकता जैसे संवेदनशील विषयों में हस्तक्षेप न कर सके।

नीति और कानून के जानकार समझते हैं कि नागरिकता का निर्धारण संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसके लिए विशेष विधिक प्रक्रिया होती है, जिसे चुनाव आयोग की सीमाओं में लाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि चुनाव आयोग के इस कदम से नागरिकों के मौलिक अधिकारों को खतरा हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से हाशिए पर हैं।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, जहां विभिन्न पक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं। अदालत से उम्मीद है कि वह इस जटिल विषय पर निष्पक्ष और न्यायसंगत फैसला सुनाएगी जो भारतीय संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र की रक्षा करेगा।

वहीं चुनाव आयोग ने अपनी भूमिका को सही ठहराते हुए कहा है कि उनकी कोशिश चुनाव प्रक्रिया को सुचारू और निष्पक्ष बनाना है और उनकी कोई ऐसी मंशा नहीं है जिससे नागरिकों के अधिकारों का हनन हो। आयोग के वकीलों ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग की सीमाएं व्यापक हैं लेकिन वह हमेशा विधिक दायरे में रहते हुए काम करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का फैसला पूरे लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह तय करेगा कि संवैधानिक संस्थाओं की शक्तियों का दायरा क्या होना चाहिए और उनके दायित्वों की सीमा को कैसे परिभाषित किया जाए।

इस पूरे विवाद के बीच नागरिक समाज भी उत्सुक है कि न्यायपालिका इस संवेदनशील मामले में किस प्रकार का फैसला देती है, जो पूरे देश पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की अंतिम सुनवाई कल होने वाली है, जिसमें यह तय होगा कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है या नहीं। यह फैसला न केवल चुनाव आयोग के दायरे को परिभाषित करेगा, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक तंत्र की मजबूती और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को भी परखने का मौका देगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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