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लोरी क्यों काम करती है: निद्रा के लिए संगीत के विज्ञान की बात

Why lullabies work: the science behind music for sleep

हाल के वर्षों में, निद्रा की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए संगीत चिकित्सा पर चिकित्सकों का ध्यान बढ़ा है। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि संगीत चिकित्सा के कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, जिससे यह एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बनती जा रही है।

अमेरिका तथा अन्य विश्वभर में चल रहे शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि संगीत का प्रभाव केवल मस्तिष्क को शांत करना या तनाव कम करना भर नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के गूढ़ जैविक तंत्र को भी प्रभावित करता है।

सबसे नए वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सामने आया है कि संगीत तनाव को कम करके हमारे आंतों में बसे सूक्ष्मजीवों (गट माइक्रोबायोटा) पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। आंतों की यह सूक्ष्म पारिस्थितिकी सीधे मस्तिष्क के साथ जुड़ी होती है, जिसे मस्तिष्क-गट- माइक्रोबायोटा धुरी कहा जाता है। इस धुरी के माध्यम से संगीत न केवल मानसिक तनाव घटाता है, बल्कि नींद के चक्र को भी नियंत्रित करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव की स्थिति में गट माइक्रोबायोटा असंतुलित हो सकता है, जिससे नींद न आने या खराब नींद की समस्या उत्पन्न हो सकती है। संगीत के नियमित सेवन से यह असंतुलन दूर होता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।

प्रोफेसर अनिता शर्मा, जो सोने के विज्ञान में विशेषज्ञ हैं, बताती हैं, “म्यूजिक थेरपी में उपयोग किए जाने वाले लोरी जैसे गीत विशेष रूप से धीमी गति और मधुर धुन वाले होते हैं, जो हमारी नसों को शांत करते हैं। इससे मस्तिष्क में तनाव हार्मोन का स्तर कम होता है और नींद में सहायता मिलती है।”

इसके अलावा, संगीत चिकित्सा का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि यह औषधीय दवाओं की तुलना में सस्ता और आसान है, साथ ही इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में संगीत आधारित उपचार निद्रा विकारों के उपचार में और अधिक प्रचलित होगा।

अतः, संगीत सिर्फ आनंद का स्रोत नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक रूप से समर्थित निद्रा सहायक साधन भी बन चुका है। इसीलिए, नींद संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोग अब संगीत को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दे रहे हैं।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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