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IIT-दिल्ली के अध्ययन में पता चला: मानवीय गतिविधियां भारत के ‘जंगली’ मौसम के पीछे

IIT-Delhi study finds human activity drives India’s ‘wild’ weather

नई दिल्ली: IIT-दिल्ली के एक हालिया अध्ययन ने बताया है कि मानवीय गतिविधियां भारत में मौसम संबंधी असामान्यताओं के बढ़ने के पीछे मुख्य कारण हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ऐतिहासिक वर्षा आंकड़ों पर भरोसा करना भविष्य में जलवायु परिवर्तनों के जोखिम का सही अंदाजा लगाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

अध्ययन में उल्लेख है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से वर्षा के पैटर्न में बदलाव हो रहे हैं, जिससे देखने को मिल रही ‘जंगली’ और अप्रत्याशित मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं। इन परिवर्तनों में आसामान्य बारिश, अचानक बाढ़ और सूखे जैसी समस्या अधिक बार हो रही है जो देश के कृषि, जल संसाधन और जनजीवन को प्रभावित कर रही हैं।

एक वरिष्ठ शोधकर्ता ने कहा, “ऐतिहासिक वर्षा आंकड़ों पर ही निर्भर रहना आज की तेजी से बदलती जलवायु में खतरे को कम आंकना होगा। हमें वर्तमान और भविष्य के जलवायु मॉडल का विश्लेषण करना जरूरी है ताकि खतरे का सही अनुमान लगाया जा सके।”

वह आगे बताते हैं कि, “मानवीय गतिविधियों जैसे औद्योगिकीकरण, वनों की कटाई और प्रदूषण ने इस जलवायु परिवर्तन को तेज किया है, जिससे मौसम की गड़बड़ी और बढ़ रही है। इसलिए सरकार और नीति निर्धारकों को इस दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक विश्लेषण के साथ-साथ पर्यावरणीय नीतियों को भी मजबूत बनाना होगा और साथ ही जलवायु संकट से निपटने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा। इससे भारत को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और अनुकूलन उपाय अपनाने में मदद मिलेगी।

इस अध्ययन ने सरकार एवं संबंधित विभागों के लिए एक चेतावनी भी दी है कि वे जलवायु परिवर्तन के चलते भविष्य में होने वाली अप्रत्याशित और तीव्र मौसमी घटनाओं के लिए बेहतर तैयारियां करें। साथ ही, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और जल संरक्षण योजनाओं को सुदृढ़ किया जाए।

सारांश में कहा जा सकता है कि यह शोध स्पष्ट करता है कि मानवीय क्रियाकलापों का प्रभाव भारत के मौसम पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है और आगामी समय में जलवायु की अस्थिरता को कम करने व बेहतर प्रबंधन के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाना अनिवार्य है।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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