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गंभीर चिंताओं के बावजूद केरल बजट में प्रतिबद्ध व्यय घटाने पर कोई चर्चा नहीं

Despite grave concerns raised in the white paper, Kerala budget silent on bringing down committed expenditure

केरल सरकार का बजट 2026-27 में प्रतिबद्ध व्यय को लेकर चिंताएं बढ़ीं

तिरुवनंतपुरम। केरल के 2026-27 के वित्तीय बजट में प्रतिबद्ध व्यय ₹1.22 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जो राज्य की कुल आय का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा है। इस बीच, वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान राज्य के राजस्व में सबसे बड़े हिस्सेदार बने हुए हैं, जिससे आर्थिक चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केरल सरकार के बजट दस्तावेज में इस विषय पर कोई ठोस रणनीति या कदम नहीं दिखता जो प्रतिबद्ध व्यय को कम करने में मददगार साबित हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राज्य इस बढ़ते खर्च को नियंत्रित नहीं करता है तो भविष्य में वित्तीय स्थिरता को खतरा हो सकता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वेतन राशि एवं पेंशन पर दी जाने वाली रकम में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, जो आर्थिक विकास के लिए बाधक साबित हो सकती है। ब्याज भुगतान भी इस सूची में प्रमुख है, जिस पर बड़े पैमाने पर संसाधन खर्च किए जा रहे हैं।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिबद्ध व्यय में này कमी के बिना केरल के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव और बढ़ेगा। इससे योजना और विकास परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे इस समस्या को समझते हैं और अगले बजट में इसे लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। हालांकि, बजट दस्तावेजों में फिलहाल इस दिशा में कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।

स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माताओं को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा ताकि केरल की आर्थिक संरचना मजबूत बनी रहे और जनकल्याणकारी योजनाओं को निरंतरता मिल सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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