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मदांबी सुब्रमणियन ने कथकली संगीत में कर्नाटिक संबंधों पर चर्चा की

Madambi Subramanian talks about Kathakali music’s Carnatic connection

पुणे। कथकली संगीत की जटिल परम्परा और उसके कर्नाटिक संगीत से जुड़े इतिहास पर प्रसिद्ध कवि और अनुभवी गायक मदांबी सुब्रमणियन ने एक विशेष वार्ता में प्रकाश डाला। कथकली, केरल की पारंपरिक नाट्य संगीत विधा है, जिसे आमतौर पर केवल सोपाना संगीत प्रणाली से जोड़ा जाता रहा है। लेकिन सुब्रमणियन ने अपनी गहन प्रशिक्षण और अनुभव के आधार पर बताया कि कथकली संगीत की जड़े केरल की सोपाना परंपरा से कहीं अधिक विस्तृत और विविध हैं।

मदांबी ने कहा, “कथकली संगीत की उत्पत्ति केवल सोपाना संगीत पर निर्भर नहीं है बल्कि यह कर्नाटिक संगीत की परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।” उन्होंने चर्चा की कि कथकली संगीत में प्रयुक्त कई राग और तालकृतियाँ कर्नाटिक संगीत की संरचनाओं से प्रभावित हैं, जो इसे एक समृद्ध और जटिल शास्त्रीय संगीत रूप बनाती हैं।

इस बात पर कि कथकली संगीत का विकास कैसे हुआ, मदांबी ने बताया कि केरल के विभिन्न संगीताचार्यों ने विभिन्न समयों में कथकली में कर्नाटिक संगीत की तकनीकों को सम्मिलित किया, जिससे इस कला को नई गहराई और व्यावहारिकता मिली। उन्होंने यह भी समझाया कि कथकली के स्वर और राग, कर्नाटिक संगीत के उन स्वरूपों से प्रेरित हैं जो अन्य दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत विधाओं में पाए जाते हैं।

मदांबी सुब्रमणियन की मौलिक और ऐतिहासिक दृष्टि कथकली संगीत के प्रेमियों, कलाकारों, और शोधकर्ताओं के लिए न केवल एक शिक्षाप्रद अनुभव रही बल्कि इस पारंपरिक कला की गहन समझ को भी बढ़ावा दिया। इस विश्लेषण ने बताया कि पारंपरिक संगीत का अध्ययन केवल उसकी सतही परतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसमें निहित सांस्कृतिक और शास्त्रीय संबंधों को भी समझना आवश्यक है।

यह उल्लेखनीय है कि कथकली संगीत, अपनी विविधता और समृद्धि के कारण, आज भी दक्षिण भारत और विश्व के अन्य हिस्सों में शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के मध्य काफी सम्मानित है। मदांबी सुब्रमणियन के विचार इस बात की पुष्टि करते हैं कि कथकली संगीत का इतिहास और उसकी परंपरा कर्नाटिक संगीत के बिना अधूरी है। इस वार्ता से कलाकारों और संगीतविदों को कथकली की जड़ों को बेहतर समझने में मदद मिलेगी और इसे विश्वभर में उचित पहचान मिलेगी।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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