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छात्रों को विवाद करने की कला सीखने की आवश्यकता क्यों है

Why students need to learn the art of disagreeing well

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: आज के युग में संवाद कौशल का महत्त्व लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से छात्रों के लिए ‘सही तरीके से असहमत होना’ एक अत्यंत आवश्यक क्षमता बन चुकी है। विवाद करने की कला केवल अपने विचारों को प्रस्तुत करने की बात नहीं है, बल्कि दूसरों के विचारों का सम्मान करते हुए तर्कसंगत ढंग से मतभेद व्यक्त करने की प्रक्रिया भी है।

सही तरीके से असहमत होना यह समझने की क्षमता है कि आप किसी की व्यक्‍तिगत अहमियत को कम किए बिना उनके विचारों पर प्रश्न उठा सकते हैं। यह ऐसी दक्षता है जहाँ व्यक्ति बिना रक्षात्मक हुए अपनी बात रखता है और साथ ही यह भी स्वीकार करने को तैयार रहता है कि वह गलत भी हो सकता है।

शोध से पता चला है कि स्वस्थ बहस और संवाद से छात्रों में आलोचनात्मक सोच और निर्णय क्षमता विकसित होती है। इस प्रक्रिया में वे अपने विचारों को बेहतर तरीके से आकार देते हैं और दूसरों की सोच को भी समझने की कोशिश करते हैं। अन्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के बीच साझा संवाद से यह कौशल और निखरता है।

विवाद की कला सीखने के फायदे केवल शैक्षिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते। यह जीवन के अन्य पहलुओं जैसे कि करियर, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक जीवन में भी मूल्यवान भूमिका निभाते हैं। जब व्यक्ति बिना विवादित हुए अपनी बात प्रभावी ढंग से रख पाता है, तभी वह एक प्रभावशाली और सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में उभरता है।

शिक्षण संस्थान भी अब अपनी पाठ्यक्रम प्रथाओं में संवाद और बहस के लिए जगह दे रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में बहस प्रतियोगिताएं, समूह चर्चा और संवाद सत्र आयोजित कर इस कौशल को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विवाद को नकारात्मक न समझकर इसे एक रचनात्मक संवाद का माध्यम बनाना चाहिए।

संक्षेप में, ‘सही तरीके से असहमत होना’ न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और सामूहिक उन्नति का भी आधार है। छात्रों के लिए यह कौशल सीखना आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में बेहतर व्यक्तित्व और उज्जवल भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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