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यू.एस. और ईरान ने परमाणु वार्ताओं पर देता दिया विरोधाभासी बयान

U.S. and Iran Offer Conflicting Accounts of Nuclear Discussions

वाशिंगटन, 25 जून: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने “सर्वोच्च स्तर” की परमाणु निरीक्षणों के लिए सहमति व्यक्त की है। हालांकि, ईरानी अधिकारी ने कुछ ही घंटे पहले स्पष्ट किया कि परमाणु मुद्दे पर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई है। इस प्रकार, दोनों देशों ने अपनी हालिया वार्ताओं के संबंध में पूरी तरह से अलग-अलग कथानक प्रस्तुत किए हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने संवाददाताओं से बातचीत में यह दावा किया कि वार्ता में परमाणु निरीक्षणों को लेकर प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, “ईरान ने परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए सर्वोत्तम और कड़े निरीक्षणों के लिए अपनी सहमति दी है। यह एक बड़ा कदम है जो हमारे राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा हितों के अनुरूप है।”

वहीं, ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी कूटनीतिज्ञ ने स्पष्ट किया कि परमाणु मुद्दे पर कोई भी विस्तृत या निर्णायक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “हमारी बातचीत में मुख्य फोकस अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर था और परमाणु विषय पर कोई ठोस समझौता या उन्नति नहीं हुई। यह सिर्फ प्रारंभिक संवाद था।”

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों द्वारा जारी की गई यह विरोधाभासी जानकारी अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संबंधों पर असर डाल सकती है। पश्चिमी देशों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संदेह और चिंता लगातार बढ़ती रही है, वहीं ईरान बार-बार अपने शांतिपूर्ण इरादों का दावा करता रहा है।

इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक मंचों ने दोनों पक्षों से वार्ता के जरिए सभी मतभेदों को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का आह्वान किया था। हालांकि, इस बार भी वार्ता के परिणाम अटकलों के घेरे में हैं, क्योंकि पुष्टि के अभाव में संयुक्त बयान या साझा संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दोनों देशों के बीच बढ़ते संदेह और बयानबाजी से कूटनीतिक प्रयासों में बाधा आ सकती है। वहीं, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध जारी रखे हैं और उनकी वापसी नहीं होने देने की चेतावनी दी है।

ईरान की ओर से भी कहा गया है कि वे किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएंगे और अपनी सुरक्षा हितों के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। दोनों देशों के बीच इस गतिरोध के बीच, वैश्विक समुदाय की निगाहें आगामी कूटनीतिक गतिविधियों पर बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, इस दौर की बातचीत को विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि, स्पष्ट और पारदर्शी संवाद की कमी के कारण मामला उलझता नजर आ रहा है, जिससे भविष्य में और भी कड़े रुख या नई वार्ता का रास्ता खुल सकता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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