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सपा के आजम खान को बड़ा झटका, जौहर ट्रस्ट की आयकर छूट रद्द, चैरिटेबल दर्जा समाप्त

सपा नेता आजम खान को बड़ा झटका, जौहर ट्रस्ट को मिलने वाली आयकर छूट खत्म, चैरिटेबल दर्जा रद्द

रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के लिए आयकर विभाग से बड़ा झटका पहुंचा है। आयकर विभाग ने उनके मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का धारा 12AB के तहत चैरिटेबल पंजीकरण रद्द कर दिया है। इस निर्णय के बाद ट्रस्ट को आयकर अधिनियम के अंतर्गत मिलने वाली कर छूट का लाभ नहीं मिल पाएगा। यह कदम खासतौर पर इसलिए महत्व रखता है क्योंकि जौहर ट्रस्ट के जरिए ही रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन होता है।

शिकायत से हुई जांच की शुरुआत

यह विवाद नया नहीं है। वर्ष 2021 में भाजपा के विधायक आकाश सक्सेना ने ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों, विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च और ट्रस्ट को मिले चंदे को लेकर आयकर विभाग में शिकायत की थी। उनकी शिकायत में ट्रस्ट के धन प्राप्ति और उपयोग को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। इसके बाद विभाग ने मामले की गहन जांच शुरू की।

2023 में संपन्न हुई छापेमारी

जांच के दौरान 13 सितंबर 2023 को आयकर विभाग ने आजम खान से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान रामपुर में उनके आवास, जौहर विश्वविद्यालय और अन्य सम्बंधित स्थानों से दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। विभाग ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान का विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि ट्रस्ट की गतिविधियां उसके घोषित सामाजिक और शैक्षणिक उद्देश्यों के अनुरूप नहीं थीं, जिसके कारण नियमों का उल्लंघन हुआ।

विस्तृत आदेश में गंभीर टिप्पणियां

प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (केंद्रीय), लखनऊ के 147 पृष्ठों के आदेश में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आदेश में ट्रस्ट को मिले करोड़ों रुपये के दान की स्रोत और उपयोगिता पर संदेह जताया गया है। साथ ही वित्तीय लेन-देन, प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर भी कई आलोचनाएं की गई हैं। ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लगाये गए हैं।

ट्रस्ट संरचना पर भी सवाल

आदेश में ट्रस्ट की संरचना को भी चर्चा में लाया गया है। नौ सदस्यों में से पांच सदस्य आजम खान के परिवार से जुड़े हैं। विभाग ने शेष चार गैर-पारिवारिक सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि ट्रस्ट के संचालन एवं निर्णय प्रक्रिया में परिवार का प्रभाव अत्यधिक है।

विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण पर उठे सवाल

जांच के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में बने कुल 59 भवनों का मूल्यांकन किया गया, जिनका अनुमानित मूल्य 494.46 करोड़ रुपये था। जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट में निर्माण लागत, वित्तीय स्रोत और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच बेमेल पाया गया। इसके साथ ही ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित रामपुर पब्लिक स्कूल की भी जांच हुई, जो अब बंद है।

नोटिस के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला

आयकर विभाग ने 19 जून को ट्रस्ट और आजम खान को नोटिस जारी कर विभिन्न सवालों पर स्पष्टीकरण मांगा था। विभाग के अनुसार, समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पंजीकरण रद्द करने का निर्णय लिया गया।

ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज किया

जौहर ट्रस्ट ने विभाग के आरोपों को निराधार बताया है। ट्रस्ट का कहना है कि नोटिस कानूनी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है तथा आरोप केवल अनुमान और बयानों पर आधारित हैं। ट्रस्ट के अनुसार, कई अभिलेख पुलिस कार्रवाई के दौरान जब्त हो गए थे, इसलिए सभी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ट्रस्ट ने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर के कुछ भवन सरकारी निधि से बनाए गए हैं और विभाग ने सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया। ऐसे में इस मामले में आगे कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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