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एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की किताब में आपातकाल को लोकतंत्र के लिए चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया

NCERT introduces Emergency in Class 9 textbook, flagging it as ‘challenge to democracy’

नई दिल्ली। भारत में 1975 में घोषित आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को ‘लोकतंत्र के लिए चुनौती’ के रूप में शामिल किया है। यह कदम शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से लिया गया है।

संघीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस विषय पर कहा कि एनसीईआरटी ने इस विषय को शामिल कर सही दिशा में कदम उठाया है। उन्होंने इसे इतिहास की समझ को बेहतर बनाने और छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला कदम बताया।

आपातकाल, जिसे भारत में इमरजेंसी के नाम से जाना जाता है, उस समय एक संवैधानिक अध्यादेश था जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लागू किया था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर रोक लगा दी गई थी और कई राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार किया गया था। देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हुई और प्रेस की स्वतंत्रता भी सीमित हो गई।

इस विषय की पाठ्यपुस्तकों में व्यावहारिक एवं तथ्यात्मक समावेशन से छात्रों को ऐतिहासिक घटनाओं के महत्व को समझने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि 50 वर्षों बाद भी आपातकाल की विसंगतियों को याद करना और उसे शिक्षा का हिस्सा बनाना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियां न हों।

एनसीईआरटी की यह पहल शिक्षा के माध्यम से लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी और सजगता विकसित करने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सभी राज्यों से भी आग्रह किया जाएगा कि वे इस दृष्टिकोण को अपनाएं और पाठ्यक्रम को ग्रहण करें।

इस समाचार ने शिक्षाविदों, इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच काफी चर्चा छेड़ी है। कुछ का कहना है कि यह बदलाव आवश्यक था ताकि युवा पीढ़ी को इतिहास के उन महत्वपूर्ण पलों से परिचित कराया जा सके जिनका प्रभाव आज भी देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

हालांकि, कुछ आलोचक इस बदलाव को पूर्वाग्रहित मानते हुए टिप्पणी कर रहे हैं, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि पाठ्यपुस्तक में सामग्री पूरी तरह से तथ्यात्मक और निष्पक्ष है।

भारत में लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह न केवल एक ऐतिहासिक समीक्षा है बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक जागरूकता अभियान भी है। इस कदम से शिक्षकों और छात्रों दोनों को लोकतांत्रिक मूल्यों की गहरी समझ प्राप्त होगी और भविष्य में वे इस तरह की चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

इस संदर्भ में, ऐसे समय में जब देश में लोकतंत्र की जड़ों की सुरक्षा पर विचार हो रहा है, एनसीईआरटी की यह पहल विशेष महत्व रखती है। आपातकाल की घटना, उसके प्रभाव और उससे मिलने वाले सबक को समझना तथा उसे पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना शिक्षा की दृष्टि से एक आवश्यक कदम है।

यह भी देखा जाएगा कि आगामी समय में अन्य विषयों और कक्षाओं में भी ऐसे ऐतिहासिक और संवेदनशील विषयों को किस प्रकार शामिल किया जाता है ताकि छात्र व्यापक और क्रिटिकल सोच विकसित कर सकें।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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