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कम इस्लामीकरण, बढ़ा राष्ट्रवाद

Less Islamism, More Nationalism

तेहरान। मध्य पूर्वी क्षेत्र में राजनीतिक और धार्मिक संबंधों में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। ईरान समेत अन्य कई देशों में यह स्पष्ट हो रहा है कि राजनीति और धर्म के बीच की पुरानी साझेदारी कमजोर पड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे राजनीतिक और सामाजिक कारण हैं जो क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।

ईरान में, जहां लंबे समय तक इस्लामी धर्म ने राज्य की नीतियों को गठित किया था, अब वहां राष्ट्रवादी विचारों को प्राथमिकता मिल रही है। लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि धर्म से बाहर आकर देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा। इस बदलाव का असर इराक, सीरिया, लेबनान सहित कई अन्य मध्य पूर्वी देशों पर भी पड़ा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक चरमपंथ और कट्टरपंथी राजनीति से जुड़ी चीजों के प्रति जनसाधारण की निराशा इस बदलाव का एक बड़ा कारण है। वे कहते हैं कि युवाओं में राष्ट्रवादी विचारधारा मजबूत हो रही है, जो धर्मनिरपेक्ष राजनीति को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही आर्थिक सुधार, वैश्वीकरण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सुधार की उम्मीदें भी इस बदलाव को प्रभावित कर रही हैं।

मध्य पूर्व के पारंपरिक धार्मिक नेताओं और मौलवियों के प्रभाव में गिरावट के साथ ही सामाजिक मीडिया एवं सूचना के व्यापक प्रचार ने भी लोगों की सोच को बदला है। आज की पीढ़ी धार्मिक धर्मशास्त्र के बजाय आधुनिकता, विकास और राष्ट्रीय एकता की ओर अधिक आकर्षित हो रही है। इससे यह क्षेत्र धीरे-धीरे धार्मिक राजनीति से राष्ट्रवादी राजनीति की ओर बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव क्षेत्र के स्थिरता और सुरक्षा के लिहाज से सकारात्मक साबित हो सकता है। क्योंकि कट्टरपंथी और धार्मिक आधार पर राजनीति करने वाली पार्टियों की जगह राष्ट्रवादी और विकासवादी पार्टियां ले रही हैं। हालांकि, इस बदलाव के रास्ते में कई चुनौतियां हैं, लेकिन व्यापक जनसमर्थन और राजनीतिक इच्छाशक्ति इसे सफल बना सकती है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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