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मोएस कृषि द्वारा स्वयं के मंत्रालय से सब्सिडी लेने पर कांग्रेस का तंज: ‘खुला लूट’

‘Blatant loot’: Congress on MoS Agriculture getting subsidy from own ministry

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कृषि राज्य मंत्री भगिरथ चौधरी ने अपनी ही मंत्रालय से ₹99.03 लाख की सब्सिडी मंजूर कराकर भ्रष्टाचार के दावों को धता बताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इसे ‘‘खुला लूट’’ करार देते हुए भाजपा और आरएसएस की भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की कथित बातों को नकारा।

पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘जब तक बीजेपी एवं आरएसएस के चंदा-चोरों ने अपनी नाक साफ नहीं की, तब तक वे भ्रष्टाचार विरोधी अपने दावों को मनवाने में असफल रहेंगे। कृषि राज्य मंत्री भगिरथ चौधरी ने ₹99.03 लाख की सब्सिडी अपने ही विभाग से अपने प्रोजेक्ट हेतु मंजूर कराकर एक बड़ा झूठ फेंका है। यह पूरी तरह से सत्ता का दुरुपयोग और न्यायिक बर्बरता है।’’

उन्होंने बताया कि यह मामला जांच का विषय है क्योंकि मंत्रालय का अप्रत्यक्ष लाभ लेना सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी पहल के विपरीत है। किसान और जनता को सब्सिडी और सहायता की जरूरत है, न कि मंत्री द्वारा अपनी परियोजनाओं के लिए खुद को रकम मंजूर कराना। पवन खेड़ा ने कहा कि इस तरह के कदम कांग्रेस की निष्पक्षता और पारदर्शिता की चुनौतियां बढ़ाते हैं।

इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने कई बार भाजपा नेतृत्व पर धनशोधन, अनैतिक लाभ और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। पार्टी का यह आरोप है कि सत्ता में आने के बाद भी भ्रष्टाचार कम करने के बजाय सरकार ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। केंद्र सरकार ने इस आरोप का कोई तत्काल जवाब नहीं दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले भारतीय राजनीति में संभावित रूप से विश्वास संकट पैदा कर सकते हैं और जनता के बीच सत्ताधारी दल की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विपक्ष की यह कैसी भी बात हो, जनता की जागरूकता बढ़ाने और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए आवश्यक हो सकती है।

इस मामले का राजनीतिक और विधायी असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को संसद में भी उठा सकता है। वहीं, कृषि मंत्रालय ने इस बारे में टिप्पणी करने से मना कर दिया है।

यह आरोप न केवल वर्तमान सरकार की नीति-निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और नैतिकता के स्तर को भी चुनौती देता है। जनता की उम्मीद है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को सजा दी जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कृषि क्षेत्र, जो देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, उसमें मंत्री के इस प्रकार के कदम चर्चा का विषय बने हुए हैं। किसान और आम जनता चाहते हैं कि सरकार उनकी भलाई पर ध्यान दे बजाय व्यक्तिगत लाभ के सन्दर्भ में निर्णय लेने के।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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