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भाग्यराज़ के शोक को तमाशा बनाने पर रदीका सरथकुमार का मीडिया को कड़ा आरोप, कार्रवाई की मांग

‘Bhagyaraj’s mourning turned into a circus’: Radikaa Sarathkumar criticises media, calls for action

पिछले कुछ वर्षों में, मीडिया कर्मियों द्वारा शोक संतप्त परिवारों की निजता का उल्लंघन करने और उन्हें प्लेटफॉर्म बनाने के लिए उपयुक्त वातावरण न देने के कई उदाहरण सामने आए हैं। खासकर जब किसी प्रसिद्ध व्यक्ति का निधन होता है, तब सेलेब्रिटी मेहमानों के श्रद्धांजलि अर्पित करने के मौके पर मीडिया का दबाव और भी बढ़ जाता है।

मीडिया कर्मी, जो अक्सर केवल दृश्य प्राप्त करना चाहते हैं, उन वाक्यों में इतनी भीड़ जमा कर देते हैं कि शोक व्यक्त करने आए लोगों की स्वतंत्रता और सम्मान को चोट पहुंचती है। ऐसी घटनाओं ने संबंधित परिवारों को मानसिक तकलीफ देने के साथ ही एक संवेदनशील परिस्थिति में उनकी निजता भंग कर दी है।

हाल ही में, अभिनेता भाग्यराज़ के शोक को लेकर भी ऐसी ही स्थिति बनी, जहां मीडिया द्वारा इस व्यक्तिगत और दुखद समय को एक तमाशे में बदल देने की आलोचना हुई। अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता रदीका सरथकुमार ने इस संदर्भ में मीडिया की कार्रवाई पर कड़ा प्रहार किया और उचित कदम उठाने की मांग की।

रदीका ने कहा कि मीडिया को शोक संहिता का सम्मान करना चाहिए और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि केवल खबर बनाने की लालसा में किसी की भावनाओं का अपमान न किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं से अपील की कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और उनका कड़ाई से पालन हो।

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि शोक और दुःख के समय मीडिया का रवैया हमेशा सहानुभूतिपूर्ण और संयमित होना चाहिए। इसी के साथ, वे यह भी बताते हैं कि पत्रकारों को पत्रकारिता की नैतिकता का पालन करते हुए पीड़ित परिवारों की निजता का सम्मान करना अनिवार्य है ताकि वे इनके दर्द को समझ सकें और सही प्रकार से समाचार प्रस्तुत कर सकें।

मीडिया की भूमिका समाज में महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सतर्कता और संवेदनशीलता से काम लेना होगा। केवल जिस घटना की रिपोर्टिंग करनी है, उसकी उचित जानकारी देना ही उनका प्राथमिक कर्तव्य होना चाहिए, न कि किसी की पीड़ा को व्यापार बना देना।

इस मामले ने समाज में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है कि कैसे मीडिया के अति उत्साह ने घटना के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को प्रभावित किया और पीड़ितों के प्रति सम्मान की भावना को कमजोर किया।

अंततः, यह उम्मीद की जाती है कि भविष्य में मीडिया तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा ऐसे संवेदनशील विषयों को संभालने के लिए बेहतर दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे और उनका पालन सुनिश्चित किया जाएगा। ताकि देश के नागरिकों का शोक पूरी शांति और सम्मान के साथ व्यक्त किया जा सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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