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कुशल इंजीनियरों के बिना भारत के चिप निर्माण के सपने अधूरे रहेंगे

Without skilled engineers, India’s chip ambitions will fall short

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूक्ष्मप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के महत्वाकांक्षी प्रयासों के बीच एक बड़ी चुनौती सामने है। देश की चिप निर्माण उद्योग को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए कुशल इंजीनियरों की कमी एक गंभीर बाधा बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता के भारत अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास में पिछड़ सकता है।

भारत की सरकार ने चिप निर्माण उद्योग को विकसित करने के लिए कई नीतिगत पहलें शुरू की हैं। ‘नॅशनल सेमीकंडक्टर मिशन’ जैसी योजनाओं के माध्यम से देश में उच्च गुणवत्ता वाले चिप उत्पादन की आधारशिला रखी जा रही है। लेकिन इन योजनाओं को जमीन पर सफल बनाने के लिए योग्य और अनुभवी इंजीनियरों की ज़रूरत है, जो डिजाइन, उत्पादन और परीक्षण के हर चरण में दक्षता ला सकें।

मौजूदा हालात में भारत में इन क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या सीमित है। इसके साथ ही, विदेशी कंपनियों द्वारा अधिक आकर्षक वेतन और बेहतर काम करने के माहौल के कारण भारतीय इंजीनियर विदेशों की ओर रुख करते हैं। इससे घरेलू उद्योग को आवश्यक तकनीकी बल नहीं मिल पाता, जिससे उत्पादकता प्रभावित होती है।

इस समस्या का समाधान करने के लिए विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग से जुड़ी पाठ्यक्रमों को मजबूत करने, व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर देने और उद्योग-शिक्षा के सम्मिलित प्रयासों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई है। इसके अलावा, सरकार को भी स्थानीय प्रतिभाओं को रोकने और आकर्षित करने के लिए बेहतर प्रोत्साहन योजनाएं बनाने की सलाह दी गई है।

भारत के चिप उद्योग का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितनी तेजी से कुशल मानव संसाधन तैयार कर पाता है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तकनीकी दक्षता ही सफलता की कुंजी है। यदि भारत ने इस चुनौती पर सफलतापूर्वक काबू पाया, तो देश न केवल आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पा सकेगा, बल्कि विश्व के प्रमुख चिप उत्पादकों में भी अपना स्थान बना सकेगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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