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व्यापार शिक्षा: शब्दकोश की तरह नहीं, एक अनुशासन के रूप में पढ़ाने की समस्या

The problem of teaching Commerce as a dictionary and not a discipline

नई दिल्ली। भारत में वाणिज्य शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत विशाल है और हर वर्ष लाखों छात्र बी.कॉम की डिग्री प्राप्त करते हैं। हालांकि, 2024 में किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बी.कॉम स्नातकों में से केवल आधे से भी कम छात्र रोजगार योग्य पाए गए हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि वाणिज्य विषय को सिर्फ शब्दकोश की तरह सिखाया जा रहा है, न कि एक पेशेवर अनुशासन के रूप में। इसका मतलब यह है कि विद्यार्थी केवल विषय की परिभाषाओं और सिद्धांतों को याद करते हैं लेकिन व्यावहारिक ज्ञान, कौशल और उद्योग की आवश्यकताओं से उन्हें जोड़ा नहीं जाता।

शिक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका प्रमुख कारण शिक्षा प्रणाली की परंपरागत संरचना है, जो व्यावसायिक कौशल, नवीनतम तकनीकों और बाजार की मांग की अनदेखी करती है। इसके साथ ही, पाठ्यक्रम में इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण और वास्तविक दुनिया की समस्याओं सहित सीखने के अवसरों की कमी भी उद्योग से छात्रों की नियुक्ति में बाधा बन रही है।

इसके अलावा, कई विश्वविद्यालय और कॉलेज अभी भी पुराने पाठ्यक्रम और परीक्षण प्रणाली पर ही निर्भर हैं, जो छात्रों के व्यावहारिक और संचार कौशलों को विकसित करने में विफल हैं। इस वजह से, कंपनी जो भर्ती करती हैं, वे अधिकांश बी.कॉम ग्रेजुएट्स में व्यावसायिक दक्षता, समस्या सुलझाने की क्षमता और तकनीकी ज्ञान की कमी देखती हैं।

वाणिज्य शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए विशेषज्ञ यह सुझाव देते हैं कि पाठ्यक्रम को उद्योग की मांग के अनुसार अपडेट किया जाना चाहिए। साथ ही, शिक्षकों को आधुनिक व्यावसायिक माहौल और नवीनतम उद्योग मानकों के अनुकूल प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। वहीं, विद्यार्थियों को भी केवल किताबों तक सीमित नहीं रहकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना चाहिए।

सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्र को वाणिज्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए साझेदारी करनी होगी ताकि भविष्य में रोजगार योग्यता बढ़ाई जा सके। क्योंकि वर्तमान परिणाम न केवल छात्रों के लिए बल्कि देश की आर्थिक विकास गति के लिए भी चिंता का विषय हैं।

इस दिशा में कदम तभी प्रभावी होंगे जब शिक्षा संस्थान, नीति निर्माता और उद्योग एक साथ मिलकर इस समस्या को समझें और सतत सुधार की प्रक्रिया को अपनाएं। वाणिज्य के विद्यार्थियों को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक शैक्षणिक अनुशासन के रूप में देखना आज का सबसे बड़ा आवश्यकता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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