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भारत का सर्विसेज पीएमआई जून 2026 में 17 महीने के निचले स्तर 57.4 पर गिरा, मांग में नरमी

India’s services PMI drops to 17-month low of 57.4 in June 2026 as demand softens

नई दिल्ली, जून 2026: HSBC के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी ने बताया कि भारत का सर्विसेज प्रोक्यूरमेंट मैनेजमेंट इंडेक्स (PMI) जून 2026 में 57.4 के स्तर पर पहुंचकर पिछले 17 महीनों में सबसे निचले स्तर पर आ गया है। इस गिरावट को घरेलू मांग में कमी और बाजार की बढ़ती चुनौतियों के रूप में देखा जा रहा है।

PMI में यह नुकसान बाजार की स्थिति के तहत आने वाली जटिलताओं का संकेत देता है और यह स्पष्ट रूप से घरेलू मांग में कमजोरी को दर्शाता है, जिसने सेवा क्षेत्र की वृद्धि को धीमा कर दिया है। प्रांजल भंडारी के अनुसार, “मांग की नरमी के कारण सेवा क्षेत्र का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकता है।”

सर्विसेज सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यहाँ पर नौकरियों के अवसर भी व्यापक होते हैं। ऐसी स्थिति में, PMI का लगातार गिरना संकेत देता है कि सेवा क्षेत्र में आने वाले महीनों में और चुनौतियाँ उभर सकती हैं, खासकर जब घरेलू मांग कमजोर हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कम निवेश प्रवाह, और उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता में गिरावट प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, कोविड-19 महामारी के प्रभाव अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुए हैं, जो बाजार की सक्रियता को प्रभावित कर रहे हैं।

HSBC की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि सरकार और वित्तीय संस्थान उचित नीतियों के माध्यम से मांग को पुनर्जीवित नहीं करते हैं, तो सेवा क्षेत्र में यह मंदी और गहराने की आशंका है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि मांग को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना, कर सुविधाएँ देना, और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना आवश्यक होगा।

अंत में, प्रांजल भंडारी ने कहा, “यह समय नीतिगत हस्तक्षेप का है ताकि सेवा क्षेत्र फिर से मजबूत हो सके और घरेलू बाजार में मांग को स्थिर किया जा सके।” इस बीच, निवेशक और उद्योग जगत के लोग इस क्षेत्र की स्थिति पर गहरी नजर रखे हुए हैं।

भारत का सर्विसेज पीएमआई जून में गिरावट ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में सेवा क्षेत्र के विकास के लिए चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं, लेकिन उचित कदम उठाकर इस स्थिति से उबरना संभव होगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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