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महिलाएं इंजीनियरिंग में क्यों नहीं टिक पातीं

Why women aren’t staying in Engineering

इंजनियऱंग शिक्षा हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में महिलाएं इस क्षेत्र में अपनी जगह नहीं बना पाती हैं और कई बार वे काम छोड़ कर वापस नहीं लौटतीं। इसे ‘लीकी पाइपलाइन’ की समस्या कहा जाता है, जो इंजीनियरिंग में महिलाओं के करियर में बनी खाई को दर्शाता है।

देश और दुनिया भर के विशेषज्ञ इस पर लगातार हाथ डाल रहे हैं कि आखिर क्यों इंजीनियरिंग क्षेत्र में महिलाओं की संख्या में गिरावट आती है। यह गिरावट न केवल नौकरी के दौरान होती है, बल्कि डिग्री लेने की प्रक्रिया के बाद भी यह जारी रहती है। इसके पीछे के प्रमुख कारणों में कार्यस्थल पर भेदभाव, असमान अवसर, परिवार और सामाजिक दबाव, तथा कार्य और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन ना बन पाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

अनेक शोध बताते हैं कि स्नातक होने के बाद भी महिलाओं को सहकर्मियों और वरिष्ठों से उचित समर्थन नहीं मिलता। साथ ही, उनमें नेतृत्व के अवसर कम मिलते हैं, जिससे उनकी प्रगति बाधित होती है। कई बार महिलाओं को कार्यस्थल की टोकनिज़ेशन (सिर्फ संख्या पूरी करने के लिए महिलाओं को रखना) का सामना भी करना पड़ता है, जो उनकी पेशेवर संतुष्टि को कम कर देता है।

इसके साथ ही पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक अपेक्षाओं के चलते भी कई महिलाएं अपने कैरियर को निरंतरता नहीं दे पाती हैं। इन चुनौतियों के कारण ही महिलाएं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लंबी अवधि तक जुड़ी नहीं रह पातीं और इस ‘लीकी पाइपलाइन’ की समस्या गहराती जाती है।

सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियां अब विभिन्न पहल कर रही हैं जैसे कि महिला प्रतिभाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण, मेंटरशिप प्रोग्राम, फ्लेक्सिबल कार्य समय, और बेहतर कार्यस्थल नीतियां ताकि महिलाओं को इस क्षेत्र में बनाए रखा जा सके। लेकिन अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है ताकि महिलाओं को इंजीनियरिंग में टिकने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित और समर्थ बनाया जाए।

इस समस्या को समझकर और टाइप के समाधान अपनाकर ही भारत और विश्व में इंजीनियरिंग के क्षेत्र को महिलाओं के लिए अधिक समान और आकर्षक बनाया जा सकता है, जिससे तकनीकी क्षेत्र में विविधता और नवाचार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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