दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

भारत-जापान समझौतों का स्वागत, मदरसों की एटीएस जांच में सहयोग करेंगे: शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

भारत-जापान समझौतों का स्वागत, मदरसों की एटीएस जांच में सहयोग करेंगे : शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

बरेली। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने हाल ही में भारत-जापान के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौतों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ये समझौते दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक विकास और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में मदरसों की एटीएस जांच में मदरसों की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा भी जताया।

मौलाना रजवी ने अपने बयान में कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है, जिसे नष्ट करना पूरी दुनिया के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश आतंकवाद को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है, जिसके कारण खुद वह आतंकी गतिविधियों से सबसे अधिक प्रभावित भी रहा है। बावजूद इसके, सरकारों की ओर से आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति का अभाव देखा गया है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश में मदरसों पर हो रही एटीएस जांच पर भी विचार व्यक्त किए। बताया कि अब तक भाजपा सरकार बनने के बाद मदरसों की जांच के पांच आदेश जारी हो चुके हैं, जिनमें से चार पर अमल हो चुका है। मदरसों ने इन जांच आदेशों का हमेशा स्वागत किया है और उन्होंने इस जांच में सहयोग देने के लिए तैयार रहने का भी संकल्प जताया। मौलाना ने यह भी स्पष्ट किया कि मदरसे किसी भी तरह के संशय से मुक्त साफ-सुथरे दस्तावेज और खातों को पूरी तरह से उपलब्ध कराएंगे ताकि जांच प्रामाणिक और पारदर्शी हो।

उन्होंने प्रशासनिक पक्ष की भी चर्चा करते हुए कहा कि मदरसें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन आते हैं और बेहतर होता कि जांच उसी विभाग के द्वारा हो, लेकिन सरकार ने यदि एटीएस जांच का निर्णय लिया है तो इसका भी स्वागत किया जाना चाहिए। मौलाना ने सुझाव दिया कि एटीएस अधिकारी मदरसों की शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक रिकॉर्ड और संचालनों की नियमित जांच करें ताकि संसाधनों के सीमित होने के बावजूद बच्चों को दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे।

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर मौलाना ने कहा कि उनकी मृत्यु इजरायल और अमेरिका की कार्यवाहियों का परिणाम है। चार महीने बाद उनके जनाजे का जुलूस पूरे ईरान में निकाला जा रहा है जिसमें लगभग 120 देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं। भारत के प्रतिनिधि भी तेहरान में मौजूद हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि खामेनेई का पैतृक संबंध बाराबंकी जिले के किन्तूर गांव से था जहां उनका परिवार शिक्षा के उद्देश्य से ईरान गया और बस गया। किन्तूर के लोग आज भी उनकी याद में शोक व्यक्त कर रहे हैं और समय-समय पर ईरान जाकर उनसे मुलाकात करते हैं।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की इस प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि वे भारत-जापान के समझौतों का खुलकर समर्थन करते हैं और राज्य सरकार द्वारा मदरसों की जांच को पारदर्शिता और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया में सभी पक्षों के बीच सहयोग और संवाद पर जोर दिया है ताकि आतंकवाद के खात्मे और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!