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भारत में पहली बार पहचाना गया जानलेवा पक्षी वायरस PaBV-4

Deadly bird virus PaBV-4 identified for first time in India

नई दिल्ली: भारतीय पक्षी पालन और संरक्षण के क्षेत्र में एक नई चुनौती सामने आई है। भारत में पहली बार पैरट बॉर्नावायरस 4 (PaBV-4) के संक्रमण की पुष्टि हुई है, जो पिंजरे में रखे पक्षियों के बीच तेजी से फैल रहा है। इस वायरस के भारत में दस्तक देने से विशेषकर खतरे में पड़े तोते की प्रजातियों के संरक्षण एवं पालन पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है।

पैरट बॉर्नावायरस 4 एक घातक वायरस है जो मुख्य रूप से पिंजरे में रखे पक्षियों में पाया जाता है। विश्व स्तर पर यह वायरस पक्षी पालन उद्योग के लिए चिंता का विषय रहा है क्योंकि यह पक्षियों में गंभीर न्यूरोलॉजिकल और पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। हाल ही में देश के विभिन्न पक्षी संरक्षण केंद्रों और फार्मों में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिससे यह मामला पूरी तरह से गंभीर हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, PaBV-4 वायरस पक्षियों में न्यूरोलॉजिकल रोगों का कारण बनता है जो अक्सर मृत्यु तक ले जाता है। यह संक्रमित पक्षी के व्यवहार, खाने-पीने की आदतों और गतिशीलता को प्रभावित करता है। भारत में पाए गए मामलों में भी ऐसे ही लक्षण देखे गए हैं। इस वायरस का पता चलने के बाद पक्षी संरक्षण कार्यकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने इस पर नियंत्रण के लिए आपातकालीन बैठकें भी की हैं।

इस वायरस के कारण उठाए जाने वाले कदमों में संक्रमित पक्षियों का पृथक्करण, तीव्र जांच-पड़ताल और संपूर्ण क्वारंटीन प्रोटोकॉल लागू करना शामिल है। सरकार और निजी पक्षी पालन संगठन मिलकर इस खतरे से निपटने की योजना बना रहे हैं ताकि हम जल्द से जल्द इस संक्रमण को फैलने से रोक सकें।

विदेशों के अनुभवों से भी पता चलता है कि PaBV-4 संक्रमित क्षेत्र की मछलियों और पक्षियों की आबादी को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पक्षी संरक्षक और किसानों को अपने पिंजरे नियमित रूप से साफ-सफाई के साथ सैनिटाइज़ करना चाहिए तथा संदिग्ध लक्षण वाले पक्षियों को तुरंत विशेषज्ञों को दिखाना चाहिए।

पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में लगे कार्यकर्ता भी इस नए खतरे से चिंतित हैं क्योंकि कई तोते की प्रजातियां पहले से ही संकट में हैं। PaBV-4 के संक्रमण से इनके बचाव को एक और बड़ा खतरा मिल गया है। संरक्षण विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जागरूकता अभियान और व्यापक जांच कार्यक्रम शुरू किए जाएं ताकि इस वायरस की रोकथाम संभव हो सके।

संक्षेप में कहा जाए तो भारत में PaBV-4 का पता लगना पक्षी पालन और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उचित जैव सुरक्षा उपायों को अपनाया जाए जिससे हम इस संक्रमण को फैलने से रोक सकें और संकट में पड़े पक्षी प्रजातियों की सुरक्षा कर सकें। सरकार, वैज्ञानिक और पक्षी पालन समुदायों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भारत में पक्षी संरक्षण का दायरा सुरक्षित बना रह सके।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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