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डिग्री सर्टिफिकेट में देरी: UGC के 180-दिन नियम के बावजूद छात्र वर्षों से इंतजार में

Degree certificate delays: Students wait years despite UGC’s 180-day rule

नई दिल्ली। भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिग्री सर्टिफिकेट जारी करने में हो रही देरी छात्रों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने स्पष्ट रूप से 180 दिनों के अंदर डिग्री सर्टिफिकेट जारी करने का नियम बनाया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कई छात्र अपनी डिग्री हासिल करने के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि यह देरी न केवल उनकी कैरियर योजना पर प्रतिकूल असर डाल रही है, बल्कि कई मामलों में वे रोजगार या उच्च शिक्षा के अवसरों से भी वंचित हो रहे हैं। कुछ छात्र तो ऐसे हैं जिन्होंने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी की है लेकिन अभी तक उन्हें प्रमाणपत्र नहीं मिला है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिग्री सर्टिफिकेट में देरी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक अक्षमता, तकनीकी समस्याएं, और पेंडिंग दस्तावेजों की जांच शामिल हैं। साथ ही, कोविड-19 महामारी के कारण भी कई संस्थानों की प्रक्रियाएं बाधित हुईं, जिससे देरी और बढ़ गई।

यूजीसी की ओर से समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों के बावजूद, इनका पालन संस्थानों द्वारा पूरी ईमानदारी से नहीं किया जा रहा है। कई छात्रों ने शिकायत की है कि शिकायत निवारण तंत्र भी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा।

सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि वे इस समस्या को गंभीरता से लें और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करें। साथ ही, छात्रों को भी इसके प्रति सजग रहकर समय-समय पर स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।

इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. रश्मि शर्मा ने कहा, “डिग्री प्रमाणपत्र केवल एक आधिकारिक दस्तावेज नहीं है, यह छात्रों के भविष्य की कुंजी है। इसे जल्दी और पारदर्शी तरीके से जारी करना आवश्यक है ताकि युवा अपने सपनों को पूरा कर सकें।”

छात्र संगठनों ने भी इस समस्या को लेकर आंदोलन की बात कही है और याचिका के माध्यम से यूजीसी तथा संबंधित विश्वविद्यालयों को आदेश देने की मांग की है कि वे अपने नियमों का कड़ाई से पालन करें और देरी रोकें।

अंत में, यह स्पष्ट है कि डिग्री सर्टिफिकेट की देरी न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है। अतः इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द निकालना न केवल छात्रों के हित में है बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली की प्रतिष्ठा के लिए भी आवश्यक है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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