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चीन का हिलियम के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध | पूरी जानकारी

China’s temporary export ban on helium| Explained

चीन ने हाल ही में हिलियम के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हलचल मची हुई है। लगभग 80% हिलियम की मांग को चीन आयात करता है, जबकि उसकी विश्व में कुल हिलियम उत्पादन में हिस्सेदारी केवल 1.6% है। इस कदम के पीछे मुख्य वजह रूस द्वारा हिलियम के निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों के कारण वैश्विक आपूर्ति पर पड़ रहा दबाव माना जा रहा है।

हिलियम एक महत्वपूर्ण गैस है, जिसका उपयोग चिकित्सा उपकरणों, वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतःशल्य चिकित्सा में, और उच्च तकनीकी उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। चीन में बढ़ती औद्योगिकीकरण और तकनीकी विकास के चलते इसकी मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। देश ज्यादातर हिलियम रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों से आयात करता है।

रूस ने पिछले कुछ महीनों में अपनी हिलियम की निर्यात नीतियों को कड़ा कर दिया है, जिसके कारण वैश्विक बाजार में काफी कमी आ गई है। इस कमी ने हिलियम की कीमतों को बढ़ा दिया है और आपूर्ति श्रृंखला को और भी कमजोर कर दिया है। ऐसे में चीन ने अपने राष्ट्रीय संसाधनों की रक्षा और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए हिलियम के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार में और भी अस्थिरता पैदा कर सकता है। वैश्विक हिलियम आपूर्ति पर इस प्रतिबंध के प्रभाव स्थलांतरित और उपभोक्ता उद्योगों में महसूस किया जाएगा। चीन की यह नीति तब आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी से उबर रही है और सामग्री आपूर्ति मजबूत करने के प्रयास कर रही है।

इसके अलावा, यह प्रतिबंध घरेलू हिलियम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चीन की एक रणनीति भी हो सकती है। हालांकि, मौजूदा उत्पादन बहुत कम है और देश की मांग को पूरा करने में असमर्थ है, इसलिए आयात पर पूरी तरह निर्भरता बरकरार रह सकती है।

यद्यपि चीन ने इस प्रतिबंध को अस्थायी बताया है, लेकिन बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। व्यापार जगत और उद्योग जगत इस स्थिति को सतर्कता से समझ रहे हैं और संभावित विकल्पों की तलाश में हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वैश्विक स्तर पर हिलियम की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विविध स्रोतों से खरीदारी करनी होगी और वैकल्पिक गैसों के उपयोग की दिशा में शोध को भी प्रोत्साहित करना होगा।

इस बीच, उपभोक्ता और उद्योग जगत को हिलियम की बढ़ती कीमतों और सीमित आपूर्ति के लिए तैयार रहना पड़ेगा। चीन के इस निर्णय से वैश्विक ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, जो आने वाले समय में स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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