दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

Sonam Wangchuk: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना क्यों खत्म किया 26 दिन का अनशन? सोनम वांगचुक ने बताई असली वजह

नई दिल्ली, दिल्ली

सामाजिक कार्यकर्ता, इंजीनियर और शिक्षा सुधारों के प्रबल समर्थक सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। हालांकि उनके आंदोलन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी, लेकिन यह मांग पूरी हुए बिना ही उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया। इस निर्णय के बाद कई तरह के सवाल उठे कि आखिर उन्होंने अपनी प्रमुख मांग पूरी हुए बिना आंदोलन क्यों समाप्त कर दिया। अब सोनम वांगचुक ने स्वयं इसके पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके लिए किसी व्यक्ति का इस्तीफा नहीं, बल्कि आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सबसे अधिक महत्वपूर्ण थी।

59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं था। उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना, परीक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाना और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही कथित अनियमितताओं तथा पेपर लीक की घटनाओं पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन में शामिल छात्रों और समर्थकों पर कानूनी कार्रवाई होती, तो इससे उनके अभियान का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता।

वांगचुक के अनुसार, उनकी सबसे बड़ी चिंता उन हजारों छात्रों और युवाओं को लेकर थी, जिन्होंने कथित परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश लोग छात्र थे, जो अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में यदि उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई होती या मुकदमे दर्ज किए जाते, तो उनका भविष्य प्रभावित हो सकता था। इसी कारण उन्होंने आंदोलन समाप्त करने से पहले सरकार से प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा का भरोसा मांगा।

सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना 26 दिन का अनशन समाप्त किया। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद लिया गया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि ‘संसद चलो मार्च’ में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा और उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। वांगचुक ने कहा कि यह आश्वासन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था और इसी के बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन की सफलता केवल किसी मंत्री के इस्तीफे से नहीं आंकी जानी चाहिए। उनके अनुसार, असली सफलता तब होगी जब परीक्षा प्रणाली में ऐसे सुधार लागू किए जाएंगे, जिनसे भविष्य में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की घटनाएं रोकी जा सकें। उन्होंने कहा कि छात्रों का विश्वास बहाल करना और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना ही इस आंदोलन का सबसे बड़ा उद्देश्य रहा है।

केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने के अलावा परीक्षा सुधारों को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं। सरकार ने संसद में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने की बात कही है। इसके साथ ही नीट (NEET) पेपर लीक मामले के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी विचार करने का भरोसा दिया गया है। हालांकि इन आश्वासनों के अमल पर अभी सभी की नजर बनी हुई है।

सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और समाज के बीच संवाद सबसे प्रभावी माध्यम होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार अपने लिखित वादों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार लागू करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में आवश्यक हुआ तो वह छात्रों के हितों के लिए फिर आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक का यह आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था। 26 दिनों तक चले इस अनशन को देशभर के छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का व्यापक समर्थन मिला। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उनके अभियान का समर्थन करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाई।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने छात्रों का भरोसा प्रभावित किया है। ऐसे में केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो इससे लाखों छात्रों को लाभ मिलेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी।

फिलहाल सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त हो चुका है, लेकिन शिक्षा सुधारों की मांग और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का मुद्दा अब भी राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार अपने लिखित आश्वासनों को किस तरह लागू करती है। यदि सरकार परीक्षा सुधारों, पेपर लीक रोकने के उपायों और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाती है, तो इसे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाएगा।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!