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ईरान पर ‘सबसे बड़े हमले’ की तैयारी का ट्रंप का दावा, बोले- आखिरी समय में बातचीत के लिए आया फोन

वॉशिंगटन, अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई करने वाला था, लेकिन हमले से ठीक पहले ईरान ने बातचीत का प्रस्ताव रखा। ट्रंप का कहना है कि संभावित अमेरिकी कार्रवाई के दबाव में ईरान ने वार्ता का रास्ता चुना।

लास वेगास में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की। उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि कृपया ऐसा मत कीजिए, आइए बातचीत करते हैं।”

हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि यह कथित सैन्य अभियान कब प्रस्तावित था, इसकी रणनीति क्या थी और इसमें किस स्तर की कार्रवाई शामिल होती। उन्होंने केवल इतना कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला हो सकता था।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका भी सामने आती रही है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।

फिलहाल ईरान की ओर से ट्रंप के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसलिए उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत किसी भी संभावित संघर्ष को टालने का सबसे प्रभावी माध्यम हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक बयानों पर दुनिया की नजर रहेगी।


विशेषज्ञों का मानना है कि तनावपूर्ण परिस्थितियों में बातचीत और कूटनीतिक प्रयास ही स्थायी समाधान का रास्ता हो सकते हैं। आने वाले समय में दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती हैं।

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