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जब पक्षियों की बीट ने बना दिया दुनिया का सबसे अमीर देश, फिर खत्म हुआ खजाना और बदल गई किस्मत

यारेन, नाउरू

दुनिया में कई देश सोना, हीरे या कच्चे तेल की बदौलत समृद्ध बने हैं, लेकिन प्रशांत महासागर में स्थित छोटा-सा द्वीपीय देश नाउरू अपनी अनोखी कहानी के लिए जाना जाता है। महज 21 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस देश ने कभी समुद्री पक्षियों की बीट यानी गुआनो से बने फॉस्फेट के निर्यात के दम पर दुनिया के सबसे अमीर देशों में जगह बनाई थी।

वैज्ञानिकों के अनुसार, हजारों वर्षों तक समुद्री पक्षियों की बीट जमा होकर फॉस्फेट में बदल गई थी। यह फॉस्फेट कृषि में इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों का महत्वपूर्ण स्रोत था। 20वीं सदी में इसकी वैश्विक मांग तेजी से बढ़ी और नाउरू ने बड़े पैमाने पर इसका निर्यात शुरू कर दिया।

फॉस्फेट से हुई भारी कमाई ने नाउरू की तस्वीर बदल दी। देश की प्रति व्यक्ति आय दुनिया के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। सरकार ने नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च किया। उस समय नाउरू को दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाने लगा था।

लेकिन समय के साथ यही समृद्धि संकट में बदल गई। लगातार खनन के कारण फॉस्फेट के भंडार तेजी से समाप्त होने लगे। इसके साथ ही द्वीप की अधिकांश भूमि खनन के कारण बंजर हो गई, जिससे कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों की संभावनाएं भी सीमित हो गईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नाउरू ने समय रहते अपनी अर्थव्यवस्था का विविधीकरण नहीं किया। परिणामस्वरूप, फॉस्फेट खत्म होने के बाद देश को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

आज नाउरू की कहानी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण सबक मानी जाती है। यह बताती है कि प्राकृतिक संसाधनों से मिली समृद्धि तब तक ही टिकाऊ होती है, जब तक उसके साथ दीर्घकालिक आर्थिक योजना और संसाधनों का संतुलित उपयोग भी किया जाए।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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