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इंसाफ में लगी साढ़े 10 साल की देर: हत्या के वक्त अस्पताल में था आरोपी, हाई कोर्ट ने मुख्य आरोपी और दोनों बेटों को किया दोषमुक्त

निवाड़ी, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे मुख्य आरोपी राजेंद्र यादव और उसके दोनों बेटों सत्येंद्र यादव तथा जितेंद्र यादव को दोषमुक्त कर दिया है। मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि जितेंद्र यादव घटना के समय झांसी के अस्पताल में भर्ती था। इसके बावजूद उसे करीब 10 साल छह महीने जेल में रहना पड़ा।

हाई कोर्ट ने अपीलों पर सुनवाई के दौरान अभियोजन की पूरी कहानी, गवाहों के बयान और मेडिकल रिकॉर्ड का परीक्षण किया। अदालत को अभियोजन के मामले में कई विसंगतियां मिलीं। पांच घायल गवाहों की मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड में होने के बावजूद अभियोजन पक्ष उन्हें अदालत में विधिवत साबित नहीं कर सका।

2015 में हुई थी परमानंद यादव की हत्या

अभियोजन के अनुसार, 13 नवंबर 2015 को राजेंद्र यादव अपने दोनों बेटों सत्येंद्र और जितेंद्र तथा तीन अज्ञात लोगों के साथ निवाड़ी जिले में परमानंद यादव के घर पहुंचा था। आरोप था कि आरोपियों के पास लाइसेंसी बंदूक, तलवार, फरसा और लाठी जैसे हथियार थे।

अभियोजन ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने परमानंद यादव और उसके परिवार के सदस्यों पर हमला किया। इस हमले में परमानंद यादव की मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए।

मामले की सुनवाई के बाद निवाड़ी की अदालत ने राजेंद्र यादव और उसके दोनों बेटों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान में विरोधाभास

मामले की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगलपीठ ने शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयानों का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास थे।

अदालत के सामने यह भी तथ्य था कि पांच घायल गवाहों की मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड में मौजूद थीं। हालांकि, अभियोजन पक्ष इन मेडिकल रिपोर्टों को अदालत में विधिवत साबित नहीं कर पाया।

वारदात के समय अस्पताल में था जितेंद्र

जितेंद्र यादव की ओर से बचाव में अस्पताल से संबंधित रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया गया। बताया गया कि जिस समय वारदात हुई, उस दौरान जितेंद्र झांसी के अस्पताल में भर्ती था।

यह तथ्य अभियोजन के उस आरोप पर सवाल खड़ा करता था, जिसके अनुसार जितेंद्र वारदात में शामिल था। हाई कोर्ट ने मामले में उपलब्ध सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों को एक साथ रखकर उनका मूल्यांकन किया।

हाई कोर्ट ने तीनों को किया दोषमुक्त

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अभियोजन के मामले में मौजूद विरोधाभास और साक्ष्यों की कमियों को महत्वपूर्ण माना।

अदालत ने अपीलों को स्वीकार करते हुए राजेंद्र यादव, सत्येंद्र यादव और जितेंद्र यादव को दोषमुक्त कर दिया।

फैसले से तीनों आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। खास तौर पर जितेंद्र यादव के मामले में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि घटना के समय उसके अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उसे करीब 10 साल छह महीने जेल में बिताने पड़े।

यह फैसला एक बार फिर बताता है कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि के लिए अभियोजन को आरोपों को विश्वसनीय और ठोस साक्ष्यों के जरिए साबित करना आवश्यक है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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