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चीन-पाकिस्तान के बीच भारत की हवाई ताकत मजबूत करने की तैयारी, 114 राफेल पर बढ़ी उम्मीद

नई दिल्ली, दिल्ली। भारतीय वायुसेना को मजबूत करने के लिए भारत 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन ने इस प्रस्तावित सौदे के लिए भारत को अपना तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव सौंप दिया है। प्रस्तावित डील की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।

यह प्रस्ताव मई में भारत की ओर से भेजे गए ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ के जवाब में आया है। इस संभावित सौदे में भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इससे यह खरीद सिर्फ विदेशी विमानों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत में रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

भारत में होगी अधिकांश विमानों की असेंबली

प्रस्ताव के अनुसार, 18 राफेल विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में भारत को दिए जाएंगे, जबकि शेष 96 विमानों की असेंबली भारत में करने की योजना है। इस तरह 80 प्रतिशत से ज्यादा विमानों की असेंबली देश में होने की उम्मीद है।

उत्पादन प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ विमान में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी शुरुआती लगभग 30 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को भी फायदा मिल सकता है।

लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी बड़ी वजह

भारत में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। पुराने लड़ाकू विमानों को धीरे-धीरे सेवा से हटाया जा रहा है, जबकि तेजस Mk-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों को तैयार होने में अभी समय लग सकता है।

ऐसे में 114 राफेल को मौजूदा क्षमता और भविष्य की स्वदेशी फाइटर फोर्स के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

राफेल ट्विन इंजन वाला मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। यह हवाई श्रेष्ठता, इंटरसेप्शन, जमीनी हमले, टोही और समुद्री मिशन सहित कई भूमिकाएं निभा सकता है।

भारत के पास फिलहाल 36 राफेल विमान हैं, जो अंबाला और हासीमारा स्थित स्क्वाड्रनों में तैनात हैं। नए विमानों से वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल फरवरी में इस खरीद के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ दे चुकी है। अंतिम मंजूरी के लिए खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की स्वीकृति आवश्यक होगी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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