दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

15 अगस्त पर हर जगह क्यों बजता है ‘दुल्हन चली’? महेंद्र कपूर के इस गीत में तिरंगे को बनाया गया दुल्हन

मुंबई, महाराष्ट्र

स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त भारत के इतिहास का वह दिन है, जब देशभर में आजादी के जश्न के साथ देशभक्ति गीतों की आवाज भी गूंजती है। पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की बात करें तो महेंद्र कपूर की आवाज में गाया गया ‘दुल्हन चली’ आज भी लोगों के बीच खास लोकप्रिय है।

यह गीत फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ का है। मनोज कुमार और सायरा बानो पर फिल्माए गए इस गीत को गीतकार इंदीवर ने लिखा था, जबकि इसका संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था। गीत की सबसे खास बात यह है कि इसमें भारत और तिरंगे को एक दुल्हन के रूपक में प्रस्तुत किया गया है।

देशभक्ति गीतों से अलग है अंदाज

आमतौर पर देशभक्ति गीतों में देश की मिट्टी, सैनिकों, आजादी और राष्ट्रप्रेम की बात सीधे शब्दों में की जाती है। ‘दुल्हन चली’ में यह भाव कुछ अलग तरीके से सामने आता है।

गीत में तीन रंगों वाली चोली का जिक्र तिरंगे का प्रतीक है। इस तरह देश के राष्ट्रीय ध्वज को दुल्हन की पोशाक से जोड़कर भारत की खूबसूरत तस्वीर पेश की गई है।

मनोज कुमार की फिल्मों में देशभक्ति हमेशा एक प्रमुख विषय रही। यही वजह है कि उनके ऊपर फिल्माए गए कई गीत स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों का हिस्सा बन गए। ‘मेरे देश की धरती’, ‘है प्रीत जहां की रीत सदा’ जैसे गीतों की तरह ‘दुल्हन चली’ भी आज तक लोगों की यादों में बना हुआ है।

महेंद्र कपूर की आवाज ने बनाया यादगार

इस गीत की लोकप्रियता में महेंद्र कपूर की आवाज की बड़ी भूमिका रही। उनकी गायकी में जोश, भाव और ओज का ऐसा मेल था, जो देशभक्ति गीतों के लिए बेहद प्रभावी साबित हुआ।

जिस दौर में मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर, किशोर कुमार और मुकेश जैसे दिग्गज गायक हिंदी फिल्म संगीत पर छाए हुए थे, उस दौर में महेंद्र कपूर ने अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्होंने केवल हिंदी फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। पंजाबी, मराठी और गुजराती सिनेमा में भी उनकी आवाज सुनाई दी। मराठी फिल्मों में अभिनेता दादा कोंडके के लिए उनकी गायकी विशेष रूप से लोकप्रिय रही।

आज भी कायम है जादू

‘दुल्हन चली’ को रिलीज हुए कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन 15 अगस्त आते ही यह गीत फिर सुनाई देने लगता है। इसकी वजह सिर्फ इसकी धुन या आवाज नहीं, बल्कि वह प्रतीकात्मक भाव है जिसमें देश को दुल्हन के रूप में पेश किया गया है।

आज की पीढ़ी के लिए भी यह गीत पुराने भारत के सिनेमा, तिरंगे और देशभक्ति की उस सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का काम करता है, जो समय के साथ और मजबूत हुई है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!