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कावेरी जल विवाद फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तमिलनाडु ने कर्नाटक से तत्काल पानी छोड़ने की मांग की

नई दिल्ली, दिल्ली

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका पर सोमवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी। राज्य सरकार ने कर्नाटक को कावेरी जल तत्काल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।

 

सुप्रीम कोर्ट की सूची के अनुसार मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष होगी। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि उसे कावेरी जल का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है और मौजूदा स्थिति में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है।

12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से संबंधित याचिकाओं को 17 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। तमिलनाडु सरकार के अलावा अन्य पक्षों की याचिकाएं भी मामले में शामिल हैं। इनमें द्रमुक भी एक पक्ष है।

क्यों महत्वपूर्ण है कावेरी का पानी?

कावेरी नदी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण जल स्रोत है। इसका पानी कृषि, सिंचाई और पेयजल समेत कई जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में खेती के लिए नदी का पानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दूसरी ओर, कर्नाटक भी कावेरी बेसिन के बड़े हिस्से में स्थित है और वहां पेयजल तथा कृषि की जरूरतों के लिए नदी पर निर्भरता है। यही वजह है कि दोनों राज्यों के बीच पानी छोड़ने को लेकर अक्सर मतभेद सामने आते हैं।

तमिलनाडु की क्या मांग है?

तमिलनाडु सरकार की याचिका में कर्नाटक से तत्काल कावेरी जल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है। राज्य का तर्क है कि उसे अपने हिस्से का पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है।

तमिलनाडु का कहना है कि पानी की कमी का सीधा असर कृषि गतिविधियों और किसानों पर पड़ सकता है। इसलिए राज्य ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत देने की मांग की है।

कर्नाटक का पक्ष भी अहम

मामले में कर्नाटक का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। कर्नाटक पहले भी अपने जलाशयों में पानी की उपलब्धता, बारिश की स्थिति और राज्य की घरेलू तथा कृषि जरूरतों का हवाला देता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट दोनों राज्यों की दलीलों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मामले पर विचार करेगा। अदालत के सामने यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वर्तमान समय में जलाशयों में कितनी मात्रा में पानी उपलब्ध है और दोनों राज्यों की तत्काल जरूरत क्या है।

आज की सुनवाई पर नजर

कावेरी जल विवाद का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी व्यापक है। पानी छोड़ने के मुद्दे पर दोनों राज्यों में समय-समय पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलती रही है।

ऐसे में सोमवार की सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का अंतरिम निर्देश दोनों राज्यों की सरकारों के लिए तत्काल प्रभाव वाला हो सकता है।

अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु की तत्काल पानी छोड़ने की मांग पर क्या फैसला देता है और कर्नाटक को लेकर क्या निर्देश जारी करता है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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