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श्रीदेवी और ऋषि कपूर पर फिल्माया अलका याग्निक का ये गाना आज भी है सुपरहिट, धुन सुनते ही पुराना दौर याद आ जाता है

मुंबई, महाराष्ट्र

बॉलीवुड के संगीत का एक ऐसा दौर रहा है, जब गानों में सादगी, मधुरता और भावनाओं का खूबसूरत मेल हुआ करता था। उसी दौर के कई गीत आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं। श्रीदेवी और ऋषि कपूर पर फिल्माया गया फिल्म ‘बंजारन’ का रोमांटिक गीत ‘मेरे दिल की गलियों में’ भी ऐसा ही सदाबहार गाना है, जिसे सुनकर पुराने हिंदी सिनेमा की यादें ताजा हो जाती हैं।

इस गीत को अलका याग्निक और सुरेश वाडेकर ने अपनी आवाज दी थी। वहीं इसका संगीत मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था और गीत के बोल दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे। आवाज, संगीत और शब्दों का यही मेल इस गीत को खास बनाता है।

अलका याग्निक की आवाज में अलग ही मिठास

अलका याग्निक का नाम हिंदी फिल्म संगीत की सबसे सफल पार्श्व गायिकाओं में लिया जाता है। उन्होंने अपने करियर में अलग-अलग तरह के हजारों गीत गाए और रोमांटिक गानों में उनकी आवाज को खास तौर पर पसंद किया गया।

उनकी गायकी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह गीत की भावना के अनुरूप अपनी आवाज का अंदाज बदल लेती थीं। ‘मेरे दिल की गलियों में’ जैसे गीत में उनकी आवाज का नरम और मधुर अंदाज सुनने को मिलता है, जो गीत के रोमांटिक मूड को और गहरा कर देता है।

श्रीदेवी और ऋषि कपूर की जोड़ी ने जीता दिल

‘बंजारन’ में श्रीदेवी और ऋषि कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। दोनों कलाकारों की जोड़ी हिंदी फिल्मों की चर्चित जोड़ियों में शामिल रही है। ‘मेरे दिल की गलियों में’ में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री गीत को एक अलग खूबसूरती देती है।

श्रीदेवी की अदाकारी और भाव-भंगिमा तथा ऋषि कपूर का रोमांटिक अंदाज गीत की कहानी को पर्दे पर जीवंत करते हैं। यही वजह है कि सिर्फ गाना सुनने के बजाय इसे देखने पर भी उस दौर के सिनेमा की याद ताजा हो जाती है।

संगीत और बोल का खूबसूरत मेल

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की धुन इस गीत की सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है। धुन में वह मिठास है, जो पहली बार सुनने पर भी आसानी से याद रह जाती है। दूसरी ओर आनंद बख्शी के शब्द गीत की रोमांटिक भावना को आगे बढ़ाते हैं।

फिल्म ‘बंजारन’ का निर्देशन हरमेश मल्होत्रा ने किया था। इसकी कहानी पुनर्जन्म के विषय पर आधारित थी। फिल्म में श्रीदेवी और ऋषि कपूर के साथ प्राण, कुलभूषण खरबंदा, गुलशन ग्रोवर, रजा मुराद और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी नजर आए।

आज भी क्यों याद किया जाता है यह गाना?

पुराने हिंदी गानों की खासियत यही होती है कि वे समय के साथ पुराने तो होते हैं, लेकिन सुनने में बासी नहीं लगते। ‘मेरे दिल की गलियों में’ भी ऐसा ही गीत है। अलका याग्निक की मधुर आवाज, सुरेश वाडेकर की गायकी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत और आनंद बख्शी के बोल मिलकर इसे एक यादगार रोमांटिक गीत बनाते हैं।

श्रीदेवी और ऋषि कपूर की जोड़ी की वजह से भी यह गीत लोगों की यादों में बना हुआ है। यही कारण है कि पुराने बॉलीवुड संगीत की बात आते ही इस तरह के गानों को आज भी बार-बार सुनने का मन करता है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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