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फेसबुक-इंस्टाग्राम पर पोर्न ऐप के नाम पर साइबर ठगी, NCTAU ने Android यूजर्स को किया अलर्ट

**नई दिल्ली, भारत**

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोर्न ऐप के नाम से किए जा रहे विज्ञापनों के जरिए साइबर ठगी का खतरा बढ़ गया है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत काम करने वाली नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने Android यूजर्स को ऐसे खतरनाक ऐप्स से सावधान रहने की सलाह दी है। साइबर एजेंसी के मुताबिक, इन ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि डाउनलोड और इंस्टॉल होने के बाद ये यूजर्स के डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने में मदद कर सकते हैं।

## HighLights

* NCTAU ने पोर्न ऐप के नाम पर फैलाए जा रहे खतरनाक Android ऐप्स को लेकर चेतावनी जारी की।
* फेसबुक और इंस्टाग्राम विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को फर्जी वेबसाइटों तक पहुंचाया जा रहा है।
* APK डाउनलोड करवाकर एक्सेसिबिलिटी जैसी संवेदनशील परमिशन हासिल करने की कोशिश की जाती है।
* डिवाइस का नियंत्रण मिलने के बाद वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है।

### फेसबुक और इंस्टाग्राम विज्ञापनों से शुरू होता है पूरा खेल

NCTAU के अनुसार, **Night Play, Reloop, Kyss, Riva, Vima, Nexo और Vixa** जैसे नामों का इस्तेमाल कर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भ्रामक विज्ञापन चलाए जा रहे थे। इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को अश्लील सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करने वाली फिशिंग वेबसाइटों पर भेजा जाता था।

इन वेबसाइटों पर यूजर्स को Google Play Store के बजाय सीधे APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। यही इस साइबर ठगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधिकारिक ऐप स्टोर के बाहर से APK इंस्टॉल करने पर यूजर का डिवाइस गंभीर सुरक्षा जोखिम में आ सकता है।

### एक्सेसिबिलिटी परमिशन से डिवाइस पर कब्जे की कोशिश

ऐप इंस्टॉल होने के बाद वह ऐसी संवेदनशील परमिशन मांग सकता है, जिनका इस्तेमाल डिवाइस पर व्यापक नियंत्रण हासिल करने के लिए किया जाता है। खास तौर पर एक्सेसिबिलिटी परमिशन का दुरुपयोग करके साइबर अपराधी यूजर की स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी को देख सकते हैं और डिवाइस पर कुछ गतिविधियां करने में सक्षम हो सकते हैं।

ऐसे नियंत्रण का इस्तेमाल बैंकिंग और अन्य वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने या अनधिकृत लेनदेन करने के लिए किया जा सकता है। कुछ मामलों में ऐप यूजर को इसे डिवाइस की सेटिंग्स से आसानी से अनइंस्टॉल करने से रोकने की कोशिश भी कर सकता है।

### VPN के जरिए भी हो सकता है ट्रैफिक रूट

साइबर एजेंसी ने यह भी बताया कि कुछ ऐसे ऐप्स VPN इंस्टॉल कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों से जुड़े इंटरनेट ट्रैफिक को दूसरे रास्ते से रूट करने के लिए किया जा सकता है। इससे साइबर अपराधियों के लिए अपनी गतिविधियों को छिपाना और डिवाइस का दुरुपयोग करना आसान हो सकता है।

### यूजर्स कैसे रहें सुरक्षित?

NCTAU ने यूजर्स को सलाह दी है कि किसी भी अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन या लिंक पर भरोसा करके APK फाइल डाउनलोड न करें। ऐप्स को हमेशा Google Play Store या किसी विश्वसनीय आधिकारिक स्रोत से ही डाउनलोड करना चाहिए।

यूजर्स को किसी ऐप द्वारा मांगी जा रही परमिशन को भी ध्यान से जांचना चाहिए। अगर किसी अनजान ऐप की कार्यक्षमता के मुकाबले वह असामान्य या अत्यधिक संवेदनशील परमिशन मांग रहा है, तो उसे अनुमति देने से बचना चाहिए।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर दिखने वाला कोई विज्ञापन विश्वसनीय होने की गारंटी नहीं देता। खासकर ऐसे विज्ञापनों से सावधान रहना जरूरी है जो यूजर्स को तुरंत APK डाउनलोड करने या डिवाइस की सुरक्षा सेटिंग बदलने के लिए प्रेरित करते हैं।

 

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