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हिमाचल सरकार ने वित्तीय संकट के बीच जारी की विधायक क्षेत्र विकास निधि, जनजातीय क्षेत्रों को तीसरी किस्त; बर्फबारी से पहले काम पूरा करने की तैयारी

शिमला, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में गंभीर वित्तीय संकट के बावजूद सुक्खू सरकार ने विधायक क्षेत्र विकास निधि की किस्तें जारी कर दी हैं। सरकार ने विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखने के लिए निधि उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इस बार जनजातीय क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। वहां के विधायकों को तीसरी किस्त जारी की गई है, ताकि बर्फबारी शुरू होने से पहले जरूरी विकास कार्यों को पूरा किया जा सके।

सामान्य क्षेत्रों के विधायकों को अब तक विधायक क्षेत्र विकास निधि की दूसरी किस्त मिली है। जनजातीय क्षेत्रों में मौसम की चुनौती को देखते हुए वहां तीसरी किस्त जारी करने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बाद कई विकास और निर्माण कार्यों को लंबे समय तक आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि उपलब्ध मौसम के दौरान ज्यादा से ज्यादा काम पूरे किए जाएं।

2.20 करोड़ से घटकर 1.10 करोड़ हुई निधि

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में हिमाचल सरकार ने विधायक क्षेत्र विकास निधि में 50 प्रतिशत की कटौती की है। पहले प्रत्येक विधायक को 2.20 करोड़ रुपये की निधि उपलब्ध होती थी, जिसे अब घटाकर 1.10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

सरकार ने इस कटौती को राज्य की खराब वित्तीय स्थिति और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की जरूरत से जोड़ा है। सरकार के सामने एक तरफ वेतन, पेंशन और अन्य नियमित वित्तीय दायित्व हैं, तो दूसरी तरफ विकास कार्यों को जारी रखने की चुनौती है। ऐसे में खर्च को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर वित्तीय अनुशासन अपनाया जा रहा है।

हालांकि, सरकार ने विधायक निधि को पूरी तरह रोकने के बजाय किस्तों में जारी रखने का फैसला किया है। जनजातीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दिए जाने से संकेत मिलता है कि सरकार मौसम से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकास कार्यों की समयसीमा तय कर रही है।

विपक्ष ने कटौती पर जताई चिंता

विधायक क्षेत्र विकास निधि का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए किया जाता है। मुख्यमंत्री से लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों तक, सभी अपने क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों के लिए इस निधि का इस्तेमाल करते हैं।

निधि को आधा किए जाने को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है। विपक्ष का कहना है कि राशि में कटौती होने से स्थानीय विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधन कम होंगे और इसका असर आम लोगों की जरूरतों से जुड़े कार्यों पर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि मौजूदा वित्तीय परिस्थितियों में खर्च को नियंत्रित करना आवश्यक है। इसके बावजूद विकास कार्यों को पूरी तरह रोकने के बजाय उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।

जनजातीय क्षेत्रों के लिए तीसरी किस्त जारी होने से बर्फबारी से पहले लंबित विकास कार्यों को पूरा करने का अवसर मिलेगा। ऐसे में सरकार का यह कदम वित्तीय संकट के बीच विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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