दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

हिमाचल सरकार का कर्ज बढ़ा, 600 करोड़ रुपये का और ऋण लेने की तैयारी; कुल देनदारी 1.04 लाख करोड़ पार

Shimla, Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश में सरकार के बढ़ते कर्ज को लेकर वित्तीय दबाव लगातार बना हुआ है। इसी बीच राज्य सरकार ने बाजार से 600 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने का फैसला किया है। नए ऋण के बाद प्रदेश पर कुल कर्ज का आंकड़ा 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 में यह सरकार की ओर से लिया जाने वाला छठा ऋण होगा।

वित्त विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने 600 करोड़ रुपये के नए ऋण को लेकर अधिसूचना जारी की है। इसके तहत सरकार 7.78 प्रतिशत ब्याज दर वाला एसजीएस-2044 स्टॉक दोबारा जारी करेगी। ऋण की नीलामी 6 अक्टूबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुंबई स्थित ई-कुबेर सिस्टम के माध्यम से होगी। नीलामी के बाद 7 अक्टूबर को राशि प्रदेश सरकार के खाते में पहुंचने की योजना है।

यह ऋण 18 वर्ष की अवधि के लिए लिया जा रहा है। इसकी अंतिम वापसी 24 जून 2044 को होगी। सरकार को ब्याज का भुगतान वर्ष में दो बार 24 दिसंबर और 24 जून को करना होगा।

चालू वित्त वर्ष में हिमाचल सरकार इससे पहले भी कई बार बाजार से कर्ज ले चुकी है। अप्रैल में 900 करोड़ रुपये और मई में 500 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। जून में 400 करोड़ और 300 करोड़ रुपये की दो किस्तों में कुल 700 करोड़ रुपये लिए गए। इसके बाद जुलाई में भी 700 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया।

इस तरह जुलाई तक वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार 2800 करोड़ रुपये का नया ऋण ले चुकी थी। अब अक्टूबर में प्रस्तावित 600 करोड़ रुपये को जोड़ने के बाद चालू वित्त वर्ष में लिया गया कुल कर्ज 3400 करोड़ रुपये हो जाएगा।

राज्य सरकार पर कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान का भी वित्तीय दबाव है। इसके चलते सरकार को कई मौकों पर ऋण का सहारा लेना पड़ता है।

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने 41,173 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जबकि 32,004 करोड़ रुपये वापस किए थे। सरकार पर कुल कर्ज अब 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और यह चालू वर्ष में 1.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान बताया गया है।

वित्तीय स्थिति पर दबाव का एक कारण राजस्व घाटा अनुदान का बंद होना भी है। पहले राज्य को हर साल 8 से 10 हजार करोड़ रुपये की यह सहायता मिलती थी। अब यह राशि नहीं मिल रही है।

सरकार के अनुसार, राज्य की आय में से हर 100 रुपये में करीब 80 रुपये वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज के ब्याज पर खर्च हो जाते हैं। विकास कार्यों के लिए सीमित राशि बचती है। इस वित्त वर्ष में सरकार को केवल ब्याज के रूप में 7,271 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!