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कमला सोहोनी की प्रेरक कहानी: दाखिले से इनकार के बाद भी नहीं मानी हार, 14 महीने में पूरी की पीएचडी

नई दिल्ली, दिल्ली

भारतीय विज्ञान के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्होंने अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता भी बनाया। कमला सोहोनी उन्हीं नामों में शामिल हैं। वह विज्ञान विषय में पीएचडी पूरी करने वाली भारत की पहली महिला थीं। उन्होंने वर्ष 1939 में कैम्ब्रिज के न्यून्हम कॉलेज से पीएचडी पूरी की और इसे हासिल करने में उन्हें केवल 14 महीने लगे।

कमला सोहोनी के लिए विज्ञान और उच्च शिक्षा का रास्ता आसान नहीं था। जिस दौर में उन्होंने शिक्षा हासिल की, उस समय महिलाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई तरह की सामाजिक और संस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ता था।

वर्ष 1933 में कमला ने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में बायोकेमिस्ट्री में रिसर्च स्टूडेंट के तौर पर दाखिले के लिए आवेदन किया। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी बाधा उनकी योग्यता नहीं, बल्कि उनका महिला होना बना। संस्थान ने उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया।

कमला सोहोनी ने इस फैसले के सामने झुकने के बजाय अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने संस्थान के तत्कालीन निदेशक और नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन से अपने प्रवेश को लेकर संघर्ष किया। अंततः उन्हें संस्थान में प्रवेश मिला।

दाखिला मिलने के बाद कमला ने शोध के क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की। उनकी मेहनत ने यह स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक शोध में प्रतिभा का संबंध लिंग से नहीं होता।

इसके बाद कमला ने विदेश में उच्च शिक्षा जारी रखी। उन्होंने कैम्ब्रिज के न्यून्हम कॉलेज से पीएचडी पूरी की। वर्ष 1939 में उनकी पीएचडी पूरी हुई और इसके साथ ही उन्होंने भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

केवल 14 महीने में पीएचडी पूरी करना उनके शैक्षणिक सफर का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा। इससे उनकी शोध क्षमता और मेहनत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कमला सोहोनी की कहानी उस समय की महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद बाधाओं का सामना किया और अपनी योग्यता के दम पर आगे बढ़ीं।

विज्ञान में पीएचडी हासिल करने वाली भारत की पहली महिला के रूप में उनकी उपलब्धि आज भी याद की जाती है। उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि किसी व्यक्ति की क्षमता को केवल उसके लिंग के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

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