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एलोन मस्क ने स्टारलिंक के भारत लॉन्च में ‘ओलिगार्च’ हस्तक्षेप का आरोप लगाया

एलोन मस्क ने स्टारलिंक के भारत लॉन्च में ‘ओलिगार्च’ हस्तक्षेप का आरोप लगाया

नई दिल्ली: प्रसिद्ध उद्यमी एलोन मस्क ने अपने ब्रह्मांडीय उपग्रह इंटरनेट प्रोजेक्ट स्टारलिंक के भारत में लॉन्च में ‘ओलिगार्च’ या शक्तिशाली वर्ग के हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। यह आरोप उनके द्वारा तब लगाया गया जब इसके कुछ ही समय पहले स्पेसएक्स की कार्यकारी लॉरेन ड्रेयर ने कहा था कि उम्मीद है कि स्टारलिंक सेवा भारत में अगले साल तक परिचालित हो जाएगी।

एलोन मस्क ने इस मामले को लेकर चिंता जताई है कि भारत में उनके उपग्रह इंटरनेट प्रोजेक्ट की यात्रा को राजनीतिक ओलिगार्चियों और महाराष्ट्र की विवादास्पद शक्तियों के द्वारा प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने इसे एक प्रकार की बाधा बताया है, जो उनके उद्यम के सफल परिचालन में रूकावट डाल सकती है।

स्पेसएक्स की कार्यकारी लॉरेन ड्रेयर ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि कंपनी भारत के बाजार में अपनी उपग्रह इंटरनेट सेवा को जल्द से जल्द परिचालित करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्टारलिंक अगले वर्ष तक भारत में कारोबार शुरू कर पाएगा, जिससे देश के दूरदराज इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधाएं मिल सकेंगी।

स्टारलिंक परियोजना उच्च गति वाले ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा देने के लिए दुनिया भर में कई जगहों पर शुरू की गयी है, लेकिन भारत में इसे लेकर नीति और कानूनी चुनौतियां बनी हुई हैं। एलोन मस्क के आरोप से यह चर्चा फिर से तेज हो गयी है कि क्या भारत में व्यवसाय के पहले से स्थापित बड़े हितधारी प्रोजेक्ट को प्रभावित कर रहे हैं।

इस बीच भारतीय दूरसंचार विभाग और स्पेसएक्स के बीच बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इस सेवा के आने से डिजिटल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव होगा, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में, जहां इंटरनेट की पहुंच अभी भी सीमित है।

एलोन मस्क ने ट्विटर पर अपनी बात रखी और कहा कि तकनीकी नवाचार और लोगों तक इंटरनेट की पहुंच बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण है, और इसे राजनीतिक हस्तक्षेप से अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने भारत में स्टारलिंक के सफल लॉन्च की इच्छा व्यक्त की और उम्मीद जताई कि जल्द ही सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

भारत में स्टारलिंक की सेवा के आने से देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और यह ग्रामीण इलाकों के विकास में भी सहायक सिद्ध होगी। हालांकि, कंपनी को सरकार से कई स्तरों पर मंजूरी प्राप्त करनी है और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहयोग की जरूरत है ताकि उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाया जा सके।

मामले पर भारतीय सरकार की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन दूरसंचार मंत्रालय इस पर गौर कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

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